तुर्की में ट्रंप को निशाना बनाने की मांग, ईरान के कट्टरपंथी सांसदों के बयानों से बढ़ा विवाद
तुर्की में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को लेकर ईरान के कुछ कट्टरपंथी सांसदों के भड़काऊ बयानों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक टिप्पणियों में ट्रंप के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की मांग किए जाने के दावे सामने आए हैं। हालांकि, ये बयान संबंधित सांसदों के व्यक्तिगत सार्वजनिक वक्तव्य बताए जा रहे हैं और इन्हें ईरानी सरकार की आधिकारिक नीति नहीं माना गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट में हिंसक बयान का दावा
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सांसद हामिद रसाई ने सोशल मीडिया मंच पर दावा किया कि ट्रंप तुर्की में मौजूद हैं और उन्हें निशाना बनाने की बात कही। इसी तरह सांसद मोजतबा जारेई के नाम से भी भड़काऊ टिप्पणियां सामने आईं, जिनमें तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan को लेकर भी आपत्तिजनक और हिंसा भड़काने वाले बयान दिए जाने का दावा किया गया। इन बयानों की व्यापक आलोचना हो रही है।
अखबार की हेडलाइन भी बनी चर्चा का विषय
ईरान के अर्ध-सरकारी अखबार Kayhan में प्रकाशित एक विवादित हेडलाइन और संपादकीय भी चर्चा में है, जिसमें ट्रंप के खिलाफ तीखी भाषा का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, लेख में कठोर कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, अखबार में प्रकाशित विचार उसके संपादकीय रुख को दर्शाते हैं और उन्हें ईरान सरकार की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जाता।
सरकारी स्तर पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं
अब तक ईरान की सरकार या उसके आधिकारिक संस्थानों की ओर से ट्रंप के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई या इन बयानों का समर्थन करने वाली कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। वहीं, NATO शिखर सम्मेलन के दौरान तुर्की में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी रखी गई है। फिलहाल संबंधित देशों की ओर से इन बयानों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
बढ़ सकता है कूटनीतिक तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उग्र सार्वजनिक बयान पहले से तनावपूर्ण क्षेत्रीय माहौल को और संवेदनशील बना सकते हैं। हालांकि, किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे या कार्रवाई को लेकर आधिकारिक एजेंसियों की पुष्टि के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संबंधित देशों के आधिकारिक रुख पर नजर रहेगी।