राजस्थान में मूल निवास प्रमाण पत्र बनेगा ऑटोमैटिक, आवेदन और दस्तावेज़ों की झंझट होगी खत्म
राजस्थान सरकार नागरिक सेवाओं को और अधिक सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल्द ही प्रदेशवासियों को मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ई-मित्र, तहसील या सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नई डिजिटल व्यवस्था के तहत पात्र नागरिकों की पहचान सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्वतः की जाएगी और उनकी सहमति मिलने के बाद मूल निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है।
डिजिटल सिस्टम से स्वतः जारी होगा प्रमाण पत्र
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (डीओआईटी) राजस्थान स्मार्ट प्रोजेक्ट के तहत एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। इस प्लेटफॉर्म में जन्म पंजीकरण, विवाह पंजीकरण, जनाधार और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को एकीकृत किया जाएगा। जैसे ही कोई व्यक्ति निर्धारित पात्रता पूरी करेगा, सिस्टम उसकी पहचान कर मोबाइल पर सूचना भेजेगा। नागरिक की सहमति प्राप्त होने के बाद मूल निवास प्रमाण पत्र स्वतः जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रमाण पत्र को एसएसओ पोर्टल, ई-मित्र या व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों से डाउनलोड किया जा सकेगा।
बच्चों को 10 वर्ष की आयु के बाद मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था के तहत बच्चों को भी विशेष लाभ मिलने वाला है। जब किसी बच्चे की आयु 10 वर्ष पूरी होगी, तब सिस्टम यह जांच करेगा कि उसके माता-पिता राजस्थान के मूल निवासी हैं या नहीं। यदि सरकारी रिकॉर्ड में माता-पिता का मूल निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध होगा तो उनके मोबाइल नंबर पर सहमति संदेश भेजा जाएगा। सहमति मिलने के बाद बच्चे का मूल निवास प्रमाण पत्र स्वतः तैयार हो जाएगा। इससे भविष्य में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सरकारी योजनाओं में दस्तावेज़ संबंधी परेशानियां कम होंगी।
विवाहिता महिलाओं को भी मिलेगी स्वचालित सुविधा
राजस्थान सरकार की नई योजना विवाहिता महिलाओं के लिए भी राहत लेकर आएगी। वर्तमान नियमों के अनुसार राजस्थान के मूल निवासी व्यक्ति से विवाह करने वाली महिला को विवाह के दिन से ही राज्य का मूल निवासी माना जाता है। अब विवाह पंजीकरण रिकॉर्ड के आधार पर ऐसी महिलाओं की पहचान स्वतः की जाएगी। आवश्यक सत्यापन और सहमति के बाद उन्हें भी मूल निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी किया जाएगा। इससे महिलाओं को अलग से आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और दस्तावेज़ जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
सरकारी कर्मचारियों को भी मिलेगा फायदा
दूसरे राज्यों से आकर राजस्थान सरकार की सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को भी इस नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा। तीन वर्ष की नियमित सेवा पूरी होने के बाद सिस्टम स्वतः उनकी पात्रता का आकलन करेगा। कार्मिक रिकॉर्ड, जनाधार और अन्य सरकारी डेटा के आधार पर पहचान होने पर संबंधित कर्मचारी को सूचना भेजी जाएगी। सहमति मिलने के बाद मूल निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। इससे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी आसान और तेज हो जाएगी।
वर्तमान प्रक्रिया से मिलेगी बड़ी राहत
फिलहाल मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नागरिकों को ई-मित्र या एसएसओ पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना पड़ता है। इसके साथ राशन कार्ड, आधार कार्ड, जनाधार, फोटो, बिजली-पानी के बिल और अन्य दस्तावेज़ जमा कराने होते हैं। आवेदन तहसील कार्यालय में सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरता है, जिसमें आमतौर पर 7 से 8 दिन का समय लग जाता है। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल और स्वचालित हो जाएगी, जिससे समय, श्रम और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी।
जल्द शुरू हो सकती है नई व्यवस्था
डीओआईटी अधिकारियों के अनुसार तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और कुछ बिंदुओं पर गृह विभाग से राय ली जा रही है। उम्मीद है कि आगामी एक-दो महीनों में यह नई व्यवस्था प्रदेशभर में लागू की जा सकती है। यदि यह योजना सफल रहती है तो राजस्थान डिजिटल नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। यह पहल ई-गवर्नेंस और पेपरलेस प्रशासन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।