भरतपुर के बिहारीजी मंदिर में हीरा और चांदी की बांसुरी विवाद, देवस्थान विभाग ने तेज की जांच
भरतपुर के ऐतिहासिक लोहागढ़ किला स्थित बिहारीजी मंदिर में भगवान के श्रृंगार के लिए दान किए गए हीरे और चांदी की बांसुरी-मुकुट से जुड़े विवाद की जांच अब तेज हो गई है। शिकायत मिलने के बाद देवस्थान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भरतपुर पहुंचे और दानदाता परिवार, मंदिर कर्मचारियों तथा संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। विभाग का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन स्तर पर भेजी जाएगी।
देवस्थान विभाग ने दर्ज किए संबंधित पक्षों के बयान
मामले की गंभीरता को देखते हुए देवस्थान विभाग, जयपुर से शासन उप सचिव आलोक सैनी शनिवार को भरतपुर पहुंचे। उन्होंने मंदिर परिसर में दानदाता परिवार, विभागीय कर्मचारियों और मंदिर से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए। आलोक सैनी ने बताया कि भगवान बिहारीजी के श्रृंगार में लगाए गए हीरे और चांदी की बांसुरी-मुकुट को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी कर रिपोर्ट विभाग के सचिव को भेजी जाएगी।
दानदाता परिवार ने लगाया हीरा बदलने का आरोप
शिकायतकर्ता कृपाली बंसल ने बताया कि उनकी सास मीरा बंसल की इच्छा थी कि भगवान बिहारीजी की प्रतिमा का श्रृंगार भी अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की तरह हीरे से किया जाए। इसी उद्देश्य से परिवार ने दिसंबर 2024 में दिल्ली के करोल बाग स्थित एक ज्वेलर्स से करीब 3.65 लाख रुपये मूल्य का हीरा खरीदा। परिवार का दावा है कि इस हीरे का खरीद बिल, प्रमाणपत्र और सीरियल नंबर उनके पास सुरक्षित हैं। उनका कहना है कि हीरा तत्कालीन पुजारी को सौंपने के बाद प्रतिमा पर स्थापित किया गया था।
श्रद्धालुओं की सूचना के बाद बढ़ा संदेह
परिवार के अनुसार कुछ महीने बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने उन्हें बताया कि प्रतिमा पर लगा पत्थर पहले जैसा नहीं दिख रहा और उसकी चमक भी बदल गई है। इसके बाद परिवार ने स्वयं मंदिर पहुंचकर प्रतिमा का निरीक्षण किया। उनका आरोप है कि जहां पहले असली हीरा लगाया गया था, वहां अब किसी अन्य पत्थर या कांच जैसा पदार्थ लगा हुआ दिखाई देता है। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जांच की मांग की।
रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
देवस्थान विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सभी संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जयपुर स्थित विभागीय मुख्यालय भेजी जाएगी। इसके आधार पर ही आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
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