शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों और शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं, छात्रों की चिंताओं और हालिया घटनाक्रम का हवाला देते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। वहीं केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाने और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की बात कही जाती रही है।
केसी वेणुगोपाल ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली को लेकर युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है और इस स्थिति की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए विवादों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। इसी क्रम में पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है।
कांग्रेस ने विभिन्न संस्थाओं के कामकाज पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली विभिन्न संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन, मूल्यांकन प्रणाली और उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), सीबीएसई (CBSE) और अन्य संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि छात्रों का विश्वास बहाल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
संसद से सड़क तक विपक्ष का विरोध जारी
हाल के दिनों में विपक्षी दलों ने शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद और संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। कई विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। इससे पहले दिल्ली में आयोजित विरोध मार्च के दौरान कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार की आलोचना की। इन घटनाओं के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
छात्र आंदोलन बना राष्ट्रीय बहस का विषय
देश के कई हिस्सों में छात्रों द्वारा शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्ध परीक्षाएं और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। हालिया प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस मुद्दे ने शिक्षा सुधार, युवाओं के भविष्य और सरकारी जवाबदेही को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच समाधान पर नजर
शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर विपक्ष सरकार से जवाबदेही और मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।