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80 डॉलर से फिसलकर 76 डॉलर पर आया कच्चा तेल, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। हाल ही में 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने वाला ब्रेंट क्रूड अब करीब 76 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत का इंतजार बना हुआ है।

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी

मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। शुक्रवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 76.46 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) करीब 72.26 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। कुछ दिन पहले ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक मांग, आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तेल बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों नहीं बदलीं?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि देश में ईंधन की कीमतें सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) तय करती हैं। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ आयात लागत, टैक्स, परिवहन खर्च, विनिमय दर और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखकर मूल्य निर्धारण करती हैं। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर बदलाव का असर तुरंत खुदरा कीमतों पर दिखाई नहीं देता।

ईंधन की कीमतों में राहत की मांग तेज

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने की मांग भी तेज हो गई है। कई राजनीतिक दलों और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल सस्ता हुआ है तो इसका लाभ आम लोगों तक भी पहुंचना चाहिए। उनका तर्क है कि ईंधन की कीमतों में कमी आने से परिवहन लागत घटेगी, जिससे महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, मध्य-पूर्व की स्थिति और प्रमुख तेल उत्पादक देशों की नीतियों पर निर्भर करेंगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या और नीचे आती हैं, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा की संभावना बन सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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