CM Bhajanlal: SIR में 13 करोड़ वोट कटने का दावा भ्रामक और असत्य, सीएम भजनलाल ने विपक्ष पर साधा निशाना
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने SIR को लेकर विपक्ष के 13 करोड़ वोट कटने के दावे को भ्रामक और असत्य बताया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है।भजनलाल शर्मा के मुताबिक ड्राफ्ट मतदाता सूची में मृत, अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले नामों को प्रक्रिया के तहत चिह्नित किया गया है। उनका कहना है कि ड्राफ्ट सूची में किसी नाम का चिह्नित होना अंतिम मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है।
13 करोड़ नामों को लेकर क्या है विवाद?
SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में अलग-अलग कारणों से चिह्नित किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है। विपक्षी दल इसे बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जोड़ रहे हैं।वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि यह संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जिन्हें ड्राफ्ट स्तर पर मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों के रूप में चिह्नित किया गया। आयोग के अनुसार इसे अंतिम मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने के तौर पर देखना सही नहीं है।
सीएम भजनलाल बोले- अंतिम सूची अभी महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखना है।उन्होंने मतदाताओं से राजनीतिक दावों और अफवाहों के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की। मुख्यमंत्री के अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है।
20 राज्यों में विशेष अभियान के निर्देश
SIR के बाद चुनाव आयोग ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य उन पात्र मतदाताओं की पहचान करना और उन्हें दोबारा सूची में शामिल करना है, जो प्रक्रिया के दौरान छूट गए हो सकते हैं।चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखित निर्देश भेजे थे। इसके बाद 1 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी निर्देश दोहराए गए।
पुराने और नए रिकॉर्ड का किया जाएगा मिलान
आयोग के निर्देशों के अनुसार बूथ लेवल अधिकारी पुराने और मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड की तुलना करेंगे। इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि पहले की मतदाता सूची में दर्ज कौन से पात्र मतदाता वर्तमान सूची में शामिल नहीं हैं।ऐसे मतदाताओं को दोबारा नामांकन का अवसर दिया जाएगा। विशेष अभियान में पहली बार वोटर बनने वाले और युवा मतदाताओं को भी शामिल किया गया है।
SIR को लेकर राजनीतिक घमासान जारी
SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। विपक्ष बड़े पैमाने पर नामों के चिह्नित होने को लेकर सवाल उठा रहा है। वहीं भाजपा और चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बता रहे हैं।ऐसे में 13 करोड़ नामों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ड्राफ्ट सूची में चिह्नित नाम और अंतिम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हटाए गए नाम एक ही बात नहीं हैं। पात्र मतदाताओं के दावे और आपत्तियों के बाद सूची में बदलाव की प्रक्रिया जारी रहती है।