चूरू में शौचालय के अभाव में मासूम की दर्दनाक मौत, मां को ढूंढते रेलवे ट्रैक पर पहुंचा था 2 साल का अविनाश
चूरू जिले के बाजियों की ढाणी में दो वर्षीय अविनाश की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। 21 अक्टूबर को मां को ढूंढते हुए वह रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया था। परिजनों का आरोप है कि घर में शौचालय नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ। परिवार ने कई बार बुनियादी सुविधाओं के लिए गुहार लगाई थी। हादसे के बाद सरकारी योजनाओं के लाभ और ग्रामीण सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मां को ढूंढते हुए रेलवे ट्रैक पर पहुंचा मासूम
चूरू जिले के ठीकरिया के राजस्व गांव बाजियों की ढाणी में दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां दो वर्षीय अविनाश की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, 21 अक्टूबर की सुबह उसकी मां सीमा देवी शौच के लिए घर से बाहर गई थीं। इसी दौरान बच्चा उन्हें ढूंढते हुए रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया।सुबह करीब 8:15 बजे सीकर से जयपुर जा रही डेमू ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। हादसे के समय पिता किशनलाल वर्मा मजदूरी के लिए महाराष्ट्र गए हुए थे। परिवार में अविनाश का छह वर्षीय भाई अभिषेक भी है।
घर में शौचालय नहीं होने का आरोप
परिजनों के अनुसार, परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। करीब वर्ष 2007 में सरकारी योजना के तहत परिवार को दो कमरे बनाकर दिए गए थे। लेकिन परिवार का दावा है कि इसके बावजूद घर में शौचालय और पानी का टांका जैसी सुविधाएं नहीं मिल सकीं।परिजनों का कहना है कि शौचालय निर्माण के लिए सरपंच से दो बार गुहार लगाई गई थी। इसके बावजूद उनकी मांग पर सुनवाई नहीं हुई। परिवार के मुताबिक, बीपीएल विद्युत कनेक्शन भी नहीं मिला और बिजली कनेक्शन अपने खर्च पर करवाना पड़ा।
मजदूरी कर परिवार चलाते हैं किशनलाल
किशनलाल वर्मा के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है। उन्होंने बताया कि करीब दो साल पहले बीमारी के कारण उनके पिता श्योपाल वर्मा का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी दोनों भाइयों पर आ गईआर्थिक परेशानियों के चलते पढ़ाई बीच में छोड़कर मजदूरी करनी पड़ी। परिवार का खर्च चलाने के लिए किशनलाल महाराष्ट्र जाकर काम करते हैं। घर में छह वर्षीय अभिषेक और दो वर्षीय अविनाश के साथ परिवार जिंदगी गुजार रहा था। लेकिन हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
टीनशेड और कच्चे आशियानों में गुजर रही जिंदगी
परिजनों के अनुसार, सरकारी योजना के तहत दो कमरे मिलने के बावजूद दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी रही। परिवार आज भी टीनशेड और कच्चे आशियानों के सहारे गुजर-बसर कर रहा है।हादसे के बाद ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मदद की मांग की है। परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की अपील की गई है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
समाजसेवी ने शौचालय बनवाने की घोषणा की
हादसे के बाद समाजसेवी जीतू पूनियां पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और परिवार के लिए शौचालय बनवाने की घोषणा की।परिवार के लिए यह घोषणा राहत की उम्मीद लेकर आई है। हालांकि, शौचालय निर्माण कब तक पूरा होगा, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के बाद परिवार की जरूरतों और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जानकारी भी सामने आना बाकी है।
बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठे सवाल
अविनाश की मौत ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। साथ ही, यह घटना ग्रामीण परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने से जुड़े सवाल भी सामने लाती है।परिवार का आरोप है कि शौचालय के लिए कई बार गुहार लगाने के बावजूद सुविधा नहीं मिली। हालांकि, शौचालय की कमी और हादसे के बीच परिस्थितियों की पूरी जांच तथा संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है। घटना के बाद जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने की आवश्यकता भी रेखांकित हुई है।