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China Vs US: क्या 10 अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर चीन ने लिया जवाबी बदला? जानिए पूरा मामला

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अब आर्थिक और व्यापारिक मोर्चे पर भी खुलकर दिखाई देने लगी है। अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में चीन ने 10 अमेरिकी कंपनियों पर कार्रवाई करते हुए रक्षा और दुर्लभ खनिज क्षेत्रों से जुड़े निर्यात पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इससे दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अमेरिका-चीन के रिश्तों में फिर बढ़ी तल्खी

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। हाल के महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कई आर्थिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा और रिश्तों को सामान्य बनाने के प्रयासों के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास कम नहीं हुआ। अमेरिका द्वारा कई चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद बीजिंग ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इससे वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।

चीनी कंपनियों पर अमेरिका ने लगाए गंभीर आरोप

वाशिंगटन का आरोप है कि कुछ चीनी कंपनियां ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने में मदद कर रही थीं। अमेरिका का कहना है कि इन गतिविधियों से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। इसी आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने कई चीनी कंपनियों और उनकी सहयोगी संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करने के लिए आर्थिक दबाव की नीति जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाली विदेशी कंपनियों तथा बैंकों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रंप की यात्रा के एक महीने बाद चीन का पलटवार

चीन की ओर से उठाया गया यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा के करीब एक महीने बाद सामने आया है। उस दौरान दोनों देशों ने संबंधों को स्थिर करने और टैरिफ कम करने की दिशा में काम करने की सहमति जताई थी। हालांकि तकनीक, रक्षा और सामरिक प्रतिस्पर्धा के मुद्दों पर मतभेद लगातार बने रहे। चीन के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से चीनी सैन्य उद्यमों की सूची का विस्तार किए जाने के जवाब में यह कार्रवाई की गई है।

80 चीनी कंपनियों की ब्लैकलिस्ट से शुरू हुआ विवाद

तनाव की मौजूदा स्थिति तब और बढ़ गई जब अमेरिका ने करीब 80 चीनी कंपनियों और उनकी सहायक इकाइयों को नई ब्लैकलिस्ट में शामिल किया। अमेरिकी प्रशासन का आरोप था कि ये कंपनियां चीन की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। इस सूची में तकनीकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग से जुड़ी संस्थाओं के नाम भी शामिल किए गए। इसके बाद चीन ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि वह इस कदम का जवाब देगा और अब उसने अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई लागू कर दी है।

रक्षा और दुर्लभ खनिज क्षेत्र की अमेरिकी कंपनियां निशाने पर

चीन की नई सूची में एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई अमेरिकी कंपनियों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़ी संस्थाओं पर भी निर्यात नियंत्रण लागू किया गया है। बीजिंग ने कहा है कि सूचीबद्ध कंपनियों को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं की आपूर्ति नहीं की जाएगी और पहले से चल रही निर्यात गतिविधियों को भी तत्काल प्रभाव से रोका जाएगा। यह कदम उन उद्योगों के लिए चुनौती बन सकता है जो चीन से मिलने वाले महत्वपूर्ण खनिजों और संसाधनों पर निर्भर हैं।

कई अमेरिकी रक्षा उत्पादों की खरीद पर भी रोक

चीन के वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक खरीद एजेंसियों को कई अमेरिकी रक्षा कंपनियों के उत्पाद खरीदने से रोकने का फैसला किया है। हालांकि चीन में कार्यरत अमेरिकी निवेश वाली कंपनियों को इन प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रखा गया है। बीजिंग का कहना है कि यह निर्णय राष्ट्रीय हितों की रक्षा और जवाबी संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

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