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चीन तेजी से बढ़ा रहा परमाणु ताकत, 620 वॉरहेड के साथ दुनिया की नजरें ड्रैगन पर

वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार चीन के परमाणु वॉरहेड की संख्या 620 तक पहुंच गई है। हालांकि यह आंकड़ा अब भी अमेरिका और रूस से काफी कम है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में चीन की तेज रफ्तार वृद्धि ने दुनिया की बड़ी शक्तियों की चिंता बढ़ा दी है।

620 परमाणु वॉरहेड के साथ लगातार मजबूत हो रहा चीन

SIPRI की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 तक चीन के पास करीब 620 परमाणु वॉरहेड मौजूद थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या लगभग 600 थी। रिपोर्ट बताती है कि 2023 से 2025 के बीच चीन ने हर वर्ष अपने परमाणु भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने के साथ-साथ परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) को भी लगातार मजबूत कर रहा है।

अमेरिका और रूस से अभी भी काफी पीछे

हालांकि चीन का परमाणु जखीरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वह अभी भी अमेरिका और रूस के मुकाबले काफी पीछे है। अनुमान है कि यदि चीन 2030 तक एक हजार परमाणु वॉरहेड के लक्ष्य तक भी पहुंच जाता है, तब भी उसका भंडार दोनों महाशक्तियों की तुलना में लगभग एक-चौथाई रहेगा। यही वजह है कि वैश्विक परमाणु संतुलन में अमेरिका और रूस की बढ़त फिलहाल कायम है।

‘नो फर्स्ट यूज’ नीति पर कायम रहने का दावा

चीन लंबे समय से ‘नो फर्स्ट यूज’ यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति का समर्थन करता रहा है। बीजिंग का कहना है कि उसके परमाणु हथियार केवल आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई के लिए हैं। चीन अन्य परमाणु संपन्न देशों से भी इसी नीति को अपनाने की अपील करता रहा है। हालांकि पश्चिमी देशों के कई विशेषज्ञ इस दावे के साथ चीन की तेजी से बढ़ती परमाणु क्षमता को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं।

परमाणु क्षमता का खुला प्रदर्शन भी बढ़ा

हाल के वर्षों में चीन ने अपनी सामरिक ताकत का सार्वजनिक प्रदर्शन भी तेज किया है। वर्ष 2024 में उसने बिना परमाणु हथियार वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसने करीब 12,000 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद 2025 में जापान पर जीत की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में पहली बार चीन ने अपना ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। इसमें जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु हमला करने में सक्षम प्रणालियां शामिल थीं।

विशेषज्ञ क्यों जता रहे हैं चिंता?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी ‘सेकेंड स्ट्राइक’ यानी जवाबी परमाणु हमले की क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। यही कारण है कि वह मिसाइल तकनीक, पनडुब्बियों और लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों के आधुनिकीकरण में लगातार निवेश कर रहा है। हालांकि चीन अपनी परमाणु नीति को रक्षात्मक बताता है, लेकिन उसके तेजी से बढ़ते हथियार भंडार और सैन्य आधुनिकीकरण ने वैश्विक रणनीतिक संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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