चाबहार पोर्ट पर पाकिस्तान की नजर, ग्वादर से जोड़ने की योजना से भारत की बढ़ी चिंता
ईरान के चाबहार पोर्ट को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के साथ जोड़कर ‘सिस्टर पोर्ट’ बनाने का प्रस्ताव सामने आने के बाद भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो अरब सागर और मध्य एशिया में भारत की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
ग्वादर-चाबहार को जोड़ने का प्रस्ताव क्यों चर्चा में?
पाकिस्तान के पूर्व आर्थिक सलाहकार और विश्लेषक अहमद मुख्तार नक्शबंदी ने सुझाव दिया है कि पाकिस्तान और ईरान अपने व्यापारिक गलियारों को आपस में जोड़कर ग्वादर और चाबहार को आधिकारिक रूप से ‘सिस्टर पोर्ट’ घोषित कर सकते हैं। उनका दावा है कि इससे दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के व्यापार की संभावनाएं पैदा होंगी। ग्वादर बंदरगाह पहले से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अहम हिस्सा है, जबकि चाबहार में भारत लंबे समय से निवेश करता रहा है।
अमेरिकी प्रतिबंधों ने बढ़ाई भारत की मुश्किलें
चाबहार पोर्ट पर अमेरिका की ओर से भारत को मिली विशेष छूट समाप्त होने के बाद नई परिस्थितियां पैदा हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक भारत ने मौजूदा वित्त वर्ष में चाबहार परियोजना के लिए कोई नया बजट आवंटित नहीं किया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि भारतीय पक्ष अपनी हिस्सेदारी को अस्थायी रूप से किसी ईरानी साझेदार को हस्तांतरित करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है, हालांकि इसे स्थायी वापसी नहीं बल्कि रणनीतिक समायोजन के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों ने जताई रणनीतिक खतरे की आशंका
भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी का मानना है कि पाकिस्तान, ईरान और चीन के बढ़ते सहयोग को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि भविष्य में चाबहार और ग्वादर के बीच तालमेल बढ़ता है तो यह भारत के लिए समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा कि अरब सागर में भारत की रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
बदलती भू-राजनीति ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने नई चुनौतियां पैदा की हैं। रूस, चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संपर्क, साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारों में हो रहे बदलाव, भारत के लिए नई रणनीति की मांग कर रहे हैं। ऐसे में चाबहार पोर्ट केवल एक व्यापारिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय पहुंच और सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
चाबहार बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे भारत की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं में गिना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ता है, तो भारत को अपनी समुद्री और कूटनीतिक रणनीति को और मजबूत करना होगा।