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आग से ज्यादा खतरनाक हो सकता है धुआं, जानिए Toxic Fumes शरीर को कैसे पहुंचाते हैं नुकसान

आग लगने की घटनाओं में जान का सबसे बड़ा खतरा सिर्फ लपटों से नहीं, बल्कि धुएं और जहरीली गैसों से होता है। विशेषज्ञों के अनुसार बंद इमारतों में फैला धुआं कुछ ही मिनटों में शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक सकता है और दम घुटने से मौत का कारण बन सकता है। ऐसे में धुएं के खतरों और शुरुआती बचाव उपायों की जानकारी बेहद जरूरी है।

धुएं में छिपा होता है सबसे बड़ा खतरा

आग लगने पर केवल लकड़ी या कागज नहीं जलते, बल्कि प्लास्टिक, फोम, सिंथेटिक फर्नीचर, बिजली की वायरिंग और अन्य रासायनिक पदार्थ भी जलने लगते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, इन पदार्थों के जलने से कई जहरीली गैसें और सूक्ष्म कण निकलते हैं, जो शरीर में ऑक्सीजन की सामान्य प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि कई मामलों में लोग आग की लपटों से नहीं, बल्कि धुएं के कारण दम घुटने से अपनी जान गंवा देते हैं।

कार्बन मोनोऑक्साइड क्यों कहलाती है ‘साइलेंट किलर’?

कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन और गंधहीन गैस होती है, जिसे पहचान पाना आसान नहीं होता। CDC के अनुसार यह गैस खून में मौजूद हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन की जगह ले लेती है। इससे मस्तिष्क, हृदय और शरीर के अन्य अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, भ्रम और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। गंभीर स्थिति में व्यक्ति कुछ ही मिनटों में बेहोश हो सकता है और उसकी जान भी जा सकती है।

धुएं का फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर पड़ता है गंभीर असर

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, स्मोक इनहेलेशन इंजरी यानी धुएं को सांस के जरिए अंदर लेना आग से जुड़ी मौतों का प्रमुख कारण है। जहरीला धुआं फेफड़ों में सूजन पैदा कर सकता है, श्वसन नलिकाओं को संकुचित कर सकता है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम कर सकता है। इसके कारण निमोनिया, सांस लेने में गंभीर परेशानी और कई मामलों में ICU तक की जरूरत पड़ सकती है। आग से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद भी धुएं का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।

इन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे, बुजुर्ग, अस्थमा और COPD के मरीज, हृदय रोग से पीड़ित लोग और गर्भवती महिलाएं जहरीले धुएं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इन लोगों में ऑक्सीजन की कमी और श्वसन संबंधी जटिलताएं तेजी से विकसित हो सकती हैं। इसलिए आग लगने की स्थिति में इन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना और तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना जरूरी माना जाता है।

आग लगने पर क्या करें और कैसे बचें?

फायर सेफ्टी विशेषज्ञों की सलाह है कि आग लगने की स्थिति में तुरंत इमारत से बाहर निकलने की कोशिश करनी चाहिए। जमीन के करीब झुककर चलना बेहतर होता है, क्योंकि धुआं ऊपर की ओर जमा होता है। लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और मुंह-नाक को कपड़े से ढकना चाहिए। बाहर निकलने के बाद किसी भी स्थिति में दोबारा अंदर नहीं जाना चाहिए। यदि सांस लेने में दिक्कत हो रही हो या चक्कर महसूस हो रहे हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

ये लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें

अगर आग या धुएं के संपर्क के बाद लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर आना, बेहोशी या त्वचा और होंठों का रंग नीला पड़ने लगे, तो इसे गंभीर संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में देरी करना खतरनाक हो सकता है। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं और जानलेवा स्थितियों से बचाव संभव है।

आग से निकलने वाले प्रमुख जहरीले तत्व

  • कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide)
  • हाइड्रोजन सायनाइड (Hydrogen Cyanide)
  • जहरीले धुएं के कण (Toxic Particulates)
  • अन्य रासायनिक गैसें
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