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एमपी के कॉलेजों में अब नहीं चलेगी बंक, सार्थक एप से होगी अटेंडेंस; घर पहुंचेगा अलर्ट

मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र से कॉलेज छात्रों के लिए अनुशासन के नए नियम लागू होने जा रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग 1 जुलाई से सार्थक एप आधारित ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। अब कॉलेज से अनुपस्थित रहने या निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं करने पर छात्रों के अभिभावकों को सीधे मोबाइल पर सूचना मिलेगी। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा।

1 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था

उच्च शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र के साथ कॉलेजों में सार्थक एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने का निर्णय लिया है। इस प्रणाली में छात्रों की अटेंडेंस डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की जाएगी। यदि कोई छात्र कक्षा में उपस्थित नहीं रहता है तो उसकी जानकारी तुरंत पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी। अधिकांश मामलों में यह नंबर अभिभावकों का होगा, जिससे माता-पिता भी बच्चों की उपस्थिति पर नजर रख सकेंगे।

अभिभावकों को मिलेगा सीधा अलर्ट

नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि छात्र के कॉलेज नहीं पहुंचने या अनुपस्थित रहने की सूचना सीधे परिवार तक पहुंचेगी। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों द्वारा बिना जानकारी कॉलेज बंक करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। साथ ही अभिभावक भी बच्चों की पढ़ाई और नियमित उपस्थिति को लेकर अधिक सजग रहेंगे।

75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य

उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। वहीं 80 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति को आदर्श माना जाएगा। यदि किसी छात्र की उपस्थिति निर्धारित सीमा से कम रहती है तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है।

बायोमेट्रिक सिस्टम नहीं हुआ सफल

इससे पहले विभाग ने प्रदेश के 569 कॉलेजों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू किया था। इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन तकनीकी समस्याओं और संचालन संबंधी चुनौतियों के कारण यह व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। अब विभाग को उम्मीद है कि एप आधारित डिजिटल प्रणाली अधिक प्रभावी साबित होगी।

शिक्षण गुणवत्ता सुधारने पर फोकस

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। विभाग का कहना है कि यह कदम केवल अनुशासन बनाए रखने के लिए नहीं बल्कि शिक्षण गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से भी उठाया गया है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि नियमित उपस्थिति से छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार होगा।

नियमों का पालन सभी के लिए जरूरी

बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार जैन ने कहा कि 75 प्रतिशत उपस्थिति का नियम पहले से लागू है और इसका पालन प्रत्येक छात्र के लिए अनिवार्य है। नई डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से इस नियम की निगरानी और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।

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