BrahMos Missile: 20% बढ़ा उत्पादन, लखनऊ बना भारत की नई मिसाइल ताकत का केंद्र
भारत ने अपनी सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के उत्पादन में करीब 20% की बढ़ोतरी कर दी है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में शुरू हुई नई अत्याधुनिक उत्पादन इकाई के चालू होने से न केवल मिसाइल निर्माण की रफ्तार बढ़ी है, बल्कि रक्षा निर्यात और सैन्य आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करेगा।
ब्रह्मोस उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी
भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। यह बढ़ोतरी लखनऊ स्थित नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के संचालन के बाद संभव हुई है। बढ़ती वैश्विक मांग और भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
भारत-रूस की सफल रक्षा साझेदारी
ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 1998 में भारत के DRDO और रूस की NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उपक्रम के रूप में हुई थी। कंपनी मिसाइल के डिजाइन, विकास, उत्पादन, परीक्षण, निर्यात और रखरखाव तक की पूरी प्रक्रिया संभालती है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है, जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।
लखनऊ क्यों बना सबसे अहम केंद्र?
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थापित नई उत्पादन इकाई अब ब्रह्मोस की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग सुविधा बन चुकी है। इस प्लांट से पहला बैच भी तैयार हो चुका है। कंपनी के अनुसार, नई यूनिट के शुरू होने से उत्पादन की गति और क्षमता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यही वजह है कि लखनऊ अब भारत के रक्षा औद्योगिक गलियारे का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
चार बड़े प्रोडक्शन सेंटर से होगा निर्माण
भारत में अब ब्रह्मोस मिसाइल के चार प्रमुख उत्पादन केंद्र हैं। इनमें लखनऊ के अलावा हैदराबाद, तिरुवनंतपुरम और राजस्थान के पिलानी स्थित इकाइयां शामिल हैं। इन सभी केंद्रों के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात ऑर्डर समय पर पूरे करने की तैयारी भी मजबूत हुई है।
दुनिया में बढ़ रही ब्रह्मोस की मांग
ब्रह्मोस मिसाइल की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। फिलीपींस इस मिसाइल प्रणाली का पहला विदेशी खरीदार बन चुका है, जबकि इंडोनेशिया, वियतनाम समेत कई अन्य देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन बढ़ने से भारत को रक्षा निर्यात बढ़ाने और वैश्विक हथियार बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
क्यों खास है ब्रह्मोस मिसाइल?
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है। यह लगभग Mach 2.8 की रफ्तार से उड़ान भर सकती है और इसके विस्तारित संस्करण की मारक क्षमता लगभग 800 किलोमीटर तक बताई जाती है। इसे जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। इसके साथ ही कंपनी भविष्य की ब्रह्मोस-II हाइपरसोनिक मिसाइल के विकास पर भी काम कर रही है।