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11 साल की भारतीय मूल की बोधना ने ब्रिटेन में रचा इतिहास, बनीं सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन

बोधना सिवानंदन और श्रेयस रॉयल ने जीती 2026 ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप

नई दिल्ली। भारतीय मूल की 11 वर्षीय शतरंज प्रतिभा बोधना सिवानंदन ने ब्रिटेन में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कोवेंट्री में संपन्न 2026 ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप में बोधना ने महिला वर्ग का खिताब अपने नाम किया और ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन बन गईं। उन्होंने रोमांचक रैपिड प्लेऑफ में आयरलैंड की 14 वर्षीय त्रिशा कन्यमाराला को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इसी प्रतियोगिता में 17 वर्षीय श्रेयस रॉयल ने ओपन वर्ग का खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

रैपिड प्लेऑफ में बोधना ने हासिल की जीत

महिला वर्ग के मुकाबले में बोधना सिवानंदन और त्रिशा कन्यमाराला के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। निर्धारित मुकाबलों के बाद खिताब का फैसला रैपिड शतरंज प्लेऑफ से हुआ। बोधना ने यहां शानदार खेल दिखाते हुए जीत दर्ज की और ब्रिटिश महिला शतरंज चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। इंग्लिश चेस फेडरेशन के लिए कमेंट्री कर रहे ग्रैंडमास्टर डैनी गोर्माली ने उनकी प्रतिभा की जमकर सराहना की। बोधना की उम्र और उनके प्रदर्शन को देखते हुए इस जीत को ब्रिटिश शतरंज के इतिहास की उल्लेखनीय उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

लॉकडाउन में शुरू हुआ था शतरंज का सफर

बोधना सिवानंदन का शतरंज से जुड़ने का किस्सा भी बेहद दिलचस्प है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में शतरंज खेलना शुरू किया था। बताया जाता है कि उनके पिता के एक मित्र भारत लौटते समय कुछ सामान छोड़ गए थे, जिसमें शतरंज का बोर्ड भी शामिल था। बोधना को शतरंज के मोहरे आकर्षक लगे और उन्होंने खेल सीखना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने लगातार अभ्यास किया और कम उम्र में ही कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई।

तेज फॉर्मेट में भी पहले ही बना चुकी हैं रिकॉर्ड

बोधना की यह उपलब्धि अचानक नहीं आई है। वह शतरंज के तेज प्रारूपों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। इससे पहले वह यूके ओपन महिला ब्लिट्ज चैंपियन और संयुक्त ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियन का खिताब जीत चुकी हैं। अब क्लासिकल शतरंज में ब्रिटिश महिला चैंपियन बनने के साथ उन्होंने एक खास उपलब्धि हासिल की है। 2026 की ब्रिटिश चैंपियनशिप में उनकी एकमात्र हार छठे दौर में श्रेयस रॉयल के खिलाफ हुई थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए महिला वर्ग का खिताब अपने नाम कर लिया।

श्रेयस रॉयल ने भी ओपन वर्ग में मारी बाजी

इसी चैंपियनशिप के ओपन वर्ग में 17 वर्षीय श्रेयस रॉयल ने भी शानदार प्रदर्शन किया। नौ राउंड के मुकाबलों के बाद श्रेयस ने शीर्ष स्थान हासिल कर ब्रिटिश चैंपियन का खिताब जीता। उन्होंने अनुभवी इंग्लिश ग्रैंडमास्टर्स को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। श्रेयस पहले ही इंग्लैंड के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। उनके प्रदर्शन ने उन्हें ब्रिटेन के उभरते हुए युवा शतरंज खिलाड़ियों की सूची में और मजबूत स्थान दिलाया है।

122 साल के इतिहास में बड़ा आयोजन

2026 की ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप अपने बड़े स्तर के लिए भी चर्चा में रही। प्रतियोगिता के 122 साल के इतिहास में इस आयोजन को सबसे बड़े आयोजनों में शामिल किया गया। इसमें 1,750 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। ओपन चैंपियनशिप के लिए रिकॉर्ड 34,000 पाउंड की पुरस्कार राशि भी रखी गई थी। ऐसे बड़े आयोजन में बोधना और श्रेयस की जीत युवा शतरंज प्रतिभाओं के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।

कम उम्र में बड़ी उपलब्धि, दुनिया की नजरें बोधना पर

सिर्फ 11 साल की उम्र में ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन बनना बोधना सिवानंदन के लिए बड़ी उपलब्धि है। लॉकडाउन के दौरान एक शतरंज बोर्ड से शुरू हुआ उनका सफर अब ब्रिटेन के प्रतिष्ठित खिताब तक पहुंच चुका है। उनकी लगातार सफलताएं बताती हैं कि कम उम्र में भी प्रतिभा, अभ्यास और दृढ़ता के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है। बोधना की यह जीत आने वाले वर्षों में उनके शतरंज करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

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11 साल की भारतीय मूल की बोधना ने ब्रिटेन में रचा इतिहास, बनीं सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन

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