बीकानेर पीबीएम किडनी फेल प्रकरण: एक और प्रसूता की मौत, लापरवाही के आरोप तेज
राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने के मामले ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण में दूसरी प्रसूता की भी मौत हो गई है, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन दिनों में दूसरी मौत से बढ़ा मामला
पीबीएम अस्पताल में प्रसूता शारदा (26) की मौत के साथ यह मामला और गंभीर हो गया है। वह पिछले लगभग 20 दिनों से वेंटिलेटर पर भर्ती थी और उसकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। इससे पहले शुक्रवार को एक अन्य प्रसूता प्रीति की भी मौत हो चुकी थी। तीन दिनों के भीतर दो मौतों ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है और परिजनों में आक्रोश बढ़ गया है।
सिजेरियन डिलीवरी के बाद बढ़े किडनी फेल के मामले
जानकारी के अनुसार पिछले एक महीने में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने के कुल 6 मामले सामने आए थे। इनमें से दो महिलाओं को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, जबकि दो महिलाओं की मौत हो चुकी है। अन्य मरीजों का उपचार जारी है। इस अचानक बढ़े मामलों ने चिकित्सा व्यवस्था और इलाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरीज की बिगड़ती हालत और इलाज की स्थिति
डॉक्टरों के अनुसार शारदा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। उसकी प्लेटलेट्स तेजी से गिर रही थीं और शरीर में ऑक्सीजन स्तर भी बेहद कम हो गया था। शनिवार को हालत और खराब होने पर उसे अतिरिक्त ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अंततः रविवार शाम करीब 6 बजे उसने दम तोड़ दिया, जिसके बाद अस्पताल में माहौल तनावपूर्ण हो गया।
परिजनों के लापरवाही के आरोप और बढ़ता आक्रोश
मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समय पर सही इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों की स्थिति बिगड़ती गई। परिजनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद अस्पताल में निगरानी और व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
लगातार हो रही मौतों के बाद अब इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ सकती। स्वास्थ्य विभाग पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों की जिम्मेदारी तय करे।