#राज्य-शहर #सोशल

बीकानेर में गुमशुदगी के चौंकाने वाले आंकड़े, 2 साल 8 माह में 1925 महिलाएं और युवतियां लापता

बीकानेर में पिछले दो साल आठ माह के दौरान महिलाओं और युवतियों की गुमशुदगी के 1925 मामले दर्ज हुए। इनमें 1695 महिलाएं और युवतियां वापस मिल चुकी हैं, जबकि 230 का अब तक पता नहीं चल पाया है। आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों में 1623 महिलाएं और 302 युवतियां शामिल हैं।इन आंकड़ों के पीछे सिर्फ पुलिस रिकॉर्ड नहीं हैं। इनके साथ उन परिवारों की चिंता भी जुड़ी है, जिनके किसी सदस्य के अचानक लापता होने के बाद उनका इंतजार खत्म नहीं हुआ।

2026 में 107 महिलाएं अब भी लापता

महिलाओं की गुमशुदगी के मामलों में 2024 में 559 केस दर्ज हुए। इनमें 508 महिलाएं वापस मिल गईं, जबकि 51 का पता नहीं चल पाया।वर्ष 2025 में 619 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 551 महिलाएं वापस मिल गईं और 68 अब भी लापता हैं।वर्ष 2026 में अगस्त तक 445 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 338 वापस मिल चुकी हैं, जबकि 107 महिलाओं का अभी तक पता नहीं चला है।यानी 2026 के सिर्फ आठ महीनों में लंबित मामलों की संख्या पिछले दो पूरे वर्षों के आंकड़ों से अधिक हो गई है।

302 युवतियों की गुमशुदगी, ज्यादातर वापस मिलीं

युवतियों से जुड़े मामलों में 2024 में 106 गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 105 युवतियां वापस मिल गईं और एक का पता नहीं चल पाया।2025 में 107 युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई और सभी वापस मिल गईं।2026 में अगस्त तक 89 युवतियां लापता दर्ज हुईं। इनमें 86 वापस मिल चुकी हैं, जबकि तीन का अभी तक पता नहीं चला है।इस तरह तीनों वर्षों में कुल 302 युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 298 वापस मिल गईं और चार अब भी लापता हैं।

दो साल आठ माह में 1925 गुमशुदगियां

बीकानेर जिले में 2024, 2025 और अगस्त 2026 तक कुल 1925 महिलाओं और युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई।इनमें 1623 महिलाएं और 302 युवतियां शामिल हैं। कुल मामलों में 1695 लोग वापस मिल चुके हैं। वहीं 230 महिलाओं और युवतियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।आंकड़े यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में महिलाएं और युवतियां घर छोड़कर चली जाती हैं।

हर गुमशुदगी की वजह एक जैसी नहीं

पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हर गुमशुदगी के पीछे परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। कुछ मामलों में युवक-युवतियां बिना बताए घर से चले जाते हैं। कई मामलों में पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध या विवाह को लेकर मतभेद जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। वहीं कुछ मामलों में किसी के बहकावे में आने की बात भी सामने आती है।हालांकि किसी मामले में वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होता है। इसलिए केवल गुमशुदगी के आंकड़ों के आधार पर किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा।

पुलिस के सामने तलाश की बड़ी चुनौती

पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के अनुसार गुमशुदगी के मामले चिंताजनक हैं। पुलिस कानून के दायरे में रहते हुए परिवार के साथ समन्वय कर तलाश करती है।कई मामलों में पुलिस को सफलता भी मिलती है और गुमशुदा लोगों को वापस लाया जाता है। लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिल पाता।पुलिस के सामने चुनौती केवल गुमशुदा व्यक्ति को तलाशने की नहीं है। उसके पीछे की परिस्थितियों को समझना और परिवार को सहायता देना भी महत्वपूर्ण है।

परिवार और समाज की भूमिका भी अहम

गुमशुदगी के मामलों को लेकर परिवार और समाज की भूमिका पर भी चर्चा जरूरी है। पारिवारिक संवाद, युवाओं की समस्याओं को समझना और विवादों को समय रहते सुलझाना ऐसे मामलों को कम करने में मददगार हो सकता है।वहीं जिन लोगों का अब तक पता नहीं चला है, उनके परिवारों के लिए इंतजार सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पुलिस की तलाश जारी रहती है, लेकिन हर गुजरता दिन परिवार की बेचैनी बढ़ाता है।

बीकानेर में गुमशुदगी के आंकड़े

वर्षयुवतियां लापतावापस मिलींपता नहींमहिलाएं लापतावापस मिलींपता नहीं
2024106105155950851
2025107107061955168
2026*89863445338107
कुल302298416231397226

*2026 के आंकड़े अगस्त तक के हैं।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *