नगर निगम के बयान पर बवाल, जिंदा लोग पहुंचे तो पूछा- हमें मृत या लापता कैसे बताया?
अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारी भर्ती से जुड़ा एक बयान शनिवार को विवाद का कारण बन गया। नगर निगम आयुक्त लक्ष्मीकांत के एक अखबार में प्रकाशित बयान में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दो लोगों की मौत और दो लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। बयान सामने आने के बाद संबंधित चार लोग खुद नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और सवाल उठाया कि जब वे सभी जीवित हैं, तो उन्हें मृत या लापता कैसे बताया गया। इस दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अधिकारियों से अपना मृत्यु प्रमाण पत्र तक मांग लिया।
बयान सामने आने के बाद नगर निगम पहुंचे चार लोग
मामला सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया से जुड़े चारों लोग शनिवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना था कि वे पूरी तरह जीवित हैं और अपने स्तर पर मौजूद हैं।चारों के नगर निगम पहुंचने के बाद कार्यालय में इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई। संबंधित लोगों ने अधिकारियों से पूछा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड में उन्हें मृत या लापता किस आधार पर बताया गया।
बोले- जिंदा हैं तो मृत कैसे बताया?
नगर निगम कार्यालय पहुंचे लोगों ने अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जताई। उनका सवाल था कि यदि वे स्वयं नगर निगम कार्यालय में मौजूद हैं, तो उन्हें मृत या लापता बताए जाने की जानकारी कहां से आई।इस दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अधिकारियों से अपना मृत्यु प्रमाण पत्र देने की मांग भी की। उनकी इस बात के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का माहौल बन गया।
भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि मामला नगर निगम में चल रही सफाई कर्मचारी भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। इसी प्रक्रिया को लेकर नगर निगम की ओर से अभ्यर्थियों और संबंधित लोगों के रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई जा रही थी।इसी दौरान प्रकाशित बयान में दो लोगों को मृत और दो को लापता बताया गया। बाद में संबंधित चार लोगों के स्वयं कार्यालय पहुंचने से इस जानकारी को लेकर सवाल खड़े हो गए।
अधिकारियों से मांगा जवाब
नगर निगम कार्यालय पहुंचे लोगों ने अधिकारियों से पूछा कि उनके बारे में इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने से पहले रिकॉर्ड का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों में उनकी स्थिति क्या दर्ज है।मामले को लेकर नगर निगम परिसर में काफी देर तक बातचीत और चर्चा होती रही। संबंधित लोग इस बात को लेकर जवाब चाहते थे कि आखिर रिकॉर्ड में ऐसी जानकारी दर्ज होने की वजह क्या रही।
सोमवार को रिकॉर्ड की जांच के बाद साफ होगी स्थिति
अब मामले में सोमवार को संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की बात सामने आई है। रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चारों लोगों को मृत या लापता बताए जाने की जानकारी किस आधार पर तैयार हुई।जांच में भर्ती से जुड़े दस्तावेज, उपलब्ध रिकॉर्ड और नगर निगम की ओर से जारी जानकारी का मिलान किया जाएगा। इसके बाद गलती की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।
रिकॉर्ड में गलती या जानकारी के आदान-प्रदान में चूक?
पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चारों लोगों को मृत या लापता बताए जाने की जानकारी कैसे तैयार हुई। क्या रिकॉर्ड में कोई तकनीकी या दस्तावेजी गलती हुई या फिर अलग-अलग स्तर पर उपलब्ध जानकारी के आदान-प्रदान में चूक हुई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।फिलहाल संबंधित चारों लोगों के नगर निगम पहुंचने के बाद मामला चर्चा में है। सोमवार को रिकॉर्ड की जांच के बाद नगर निगम की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है।