दल-बदल विवाद पर सख्त हुए भगवंत मान, राष्ट्रपति से की राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग
पंजाब में दल-बदल के मुद्दे ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। उन्होंने राज्यसभा में दल बदलकर पहुंचे सदस्यों की सदस्यता तुरंत समाप्त करने की मांग उठाई। मान ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि जनादेश के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन, लोकतंत्र पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे और राष्ट्रपति भवन में हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बेहद सीमित विधायकों के बावजूद एक राजनीतिक दल की राज्यसभा में बढ़ती संख्या लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है। मान ने कहा कि यह स्थिति जनादेश की भावना के विपरीत है और इससे लोकतंत्र की पारदर्शिता प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में संवैधानिक स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की जाए ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।
दल-बदल करने वालों को बताया जनादेश के खिलाफ
मुख्यमंत्री ने दल बदलने वाले सात राज्यसभा सदस्यों पर निशाना साधते हुए उन्हें जनता द्वारा चुना गया नहीं बल्कि “चयनित” बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम न केवल राजनीतिक नैतिकता को कमजोर करते हैं बल्कि जनता के भरोसे को भी तोड़ते हैं। मान ने इन सदस्यों से इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाने की चुनौती दी, ताकि वास्तविक जनसमर्थन का परीक्षण हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब की जनता अपने अधिकारों और सम्मान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
भगवंत मान ने अपने बयान में केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव बनाने और दलों को तोड़ने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग
लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाता है। उनके अनुसार, इस तरह की कार्यप्रणाली से न केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है बल्कि संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सभी संस्थाएं निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य करें।
‘ऑपरेशन लोटस’ पर सीएम का तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री ने कथित ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसे प्रयासों पर भी कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में इस तरह की राजनीतिक रणनीतियां सफल नहीं होंगी क्योंकि यहां की जनता जागरूक और अपने जनादेश के प्रति सजग है। मान ने दोहराया कि उनकी सरकार जनता के भरोसे पर टिकी है और किसी भी तरह की साजिश को विफल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधि जनता की आवाज होते हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का दबाव या प्रलोभन लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
पंजाब के विकास और अधिकारों का मुद्दा उठाया
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के विकास कार्यों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वैध फंड रोकना या विकास में बाधा डालना पंजाब के हितों के खिलाफ है। मान ने केंद्र सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण राज्यों के विकास को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार पंजाब के अधिकारों और जनता के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी और किसी भी दबाव में नहीं आएगी।