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बंगाल में सनसनी: ‘निजाम पैलेस आ जाओ’—कुछ घंटों बाद मिली लाश, सुवेंदु के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या से सियासत गरम

पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या ने राजनीतिक माहौल को झकझोर दिया है। मध्यमग्राम में देर रात हुए इस हमले से पहले रथ ने अपने दोस्त को “निजाम पैलेस आकर चाय पर मिलने” का न्योता दिया था, जो उनकी आखिरी बातचीत साबित हुई। पूर्व वायुसेना कर्मी से रणनीतिक सहयोगी बने रथ की हत्या को लेकर साजिश के आरोप और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है, जबकि यह घटना सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक टकराव पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

आखिरी कॉल: जश्न का न्योता बना मौत का संदेश

चंद्रनाथ रथ ने 6 मई की शाम अपने करीबी दोस्त को फोन कर निजाम पैलेस आने का न्योता दिया था। उन्होंने चुनावी जीत के जश्न में चाय पर मिलने की बात कही थी। बातचीत सामान्य थी और किसी खतरे का अंदेशा नहीं था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन पर जानलेवा हमला हो गया। यह कॉल अब पूरे मामले का सबसे भावनात्मक और रहस्यमय पहलू बन गया है। दोस्त के अनुसार, अगर वह उसी वक्त मिल लेता, तो शायद घटनाक्रम कुछ और होता—यह ‘अधूरा कल’ अब एक दर्दनाक याद बन चुका है।

मध्यमग्राम में सुनियोजित हमला, गोलियों से भून दिया

उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में देर रात चंद्रनाथ रथ की कार को निशाना बनाया गया। पुलिस के अनुसार, हमलावर पहले से पीछा कर रहे थे और मौका मिलते ही बाइक और कार से घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की। गोलियां सीधे ड्राइविंग साइड और खिड़कियों पर दागी गईं, जिससे रथ गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। ड्राइवर भी घायल है। हमले की शैली से यह साफ संकेत मिल रहा है कि वारदात पूरी योजना के तहत अंजाम दी गई।

एयरफोर्स से राजनीति तक: चंद्रनाथ रथ का सफर

करीब 41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ का जीवन अनुशासन और समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने लगभग दो दशक तक भारतीय वायु सेना में सेवा दी और बाद में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। कुछ समय कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद उनका झुकाव राजनीति की ओर हुआ। पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही, जिससे उन्हें संगठनात्मक काम में समझ मिली। धीरे-धीरे वे सक्रिय राजनीति में आए और अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई। उनका व्यक्तित्व शांत लेकिन प्रभावी था, जिसने उन्हें नेताओं का भरोसेमंद सहयोगी बनाया।

सुवेंदु अधिकारी के ‘मिस्टर डिपेंडेबल’ कैसे बने

चंद्रनाथ रथ को सुवेंदु अधिकारी का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। वे पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति, कार्यकर्ता प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स संभालते थे। 2019 के आसपास वे आधिकारिक तौर पर उनकी टीम से जुड़े और हर राजनीतिक मोड़ पर साथ रहे। चाहे नंदीग्राम का हाई-प्रोफाइल चुनाव हो या अन्य सीटों की रणनीति—रथ की भूमिका अहम मानी जाती थी। पार्टी में उन्हें लो-प्रोफाइल लेकिन बेहद प्रभावशाली रणनीतिकार के तौर पर जाना जाता था।

क्या असली निशाना कोई और था?

हत्या के बाद एक बड़ा सवाल सामने आया है—क्या चंद्रनाथ रथ असली टारगेट थे या किसी और को निशाना बनाया जा रहा था? रथ के करीबी लोगों का दावा है कि यह हमला दरअसल सुवेंदु अधिकारी को संदेश देने के लिए किया गया। उनका कहना है कि रथ की गतिविधियों पर कई दिनों से नजर रखी जा रही थी। हालांकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है, लेकिन हमले की सटीकता और योजना इसे सामान्य अपराध से अलग जरूर बनाती है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने बढ़ाया तनाव

इस हत्याकांड के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बीजेपी नेताओं ने इसे सुनियोजित राजनीतिक हत्या बताया है, जबकि विपक्षी दलों पर अप्रत्यक्ष आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का नाम भी कुछ बयानों में सामने आया, हालांकि उनकी ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस घटना ने चुनाव बाद के माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।

जांच जारी, साजिश या गैंगवार?

पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। मौके से मिले कारतूस और हमले के तरीके से पेशेवर अपराधियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। ड्राइवर के बयान का इंतजार है, जो घटना का अहम गवाह हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मामला व्यक्तिगत रंजिश, राजनीतिक साजिश या संगठित अपराध से जुड़ा है। लेकिन इतना तय है कि यह हाई-प्रोफाइल हत्या राज्य की कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

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