राजस्थान में बाड़ेबंदी का खेल शुरू, कांग्रेस प्रत्याशी को जबरन ले जाने की कोशिश; पुलिस पहुंची तो समर्थक ASP से उलझे
बाड़मेर नगर परिषद चुनाव में मतदान खत्म होते ही सियासी बाड़ेबंदी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 55 वार्डों में 179 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद होने के बाद भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने में जुटे हैं। इसी बीच वार्ड 48 के कांग्रेस प्रत्याशी पारसमल माली को कथित तौर पर जबरन ले जाने की कोशिश का मामला सामने आया। सूचना पर पुलिस पहुंची तो प्रत्याशी के भाई और समर्थकों की ASP नितेश आर्य से बहस हो गई। पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लेकर एक कार जब्त की है। मामले की जांच जारी है।
कांग्रेस प्रत्याशी को जबरन ले जाने की कोशिश का आरोप
घटना बुधवार रात करीब 8:30 बजे बाड़मेर शहर के बेरियों का बास इलाके की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार वार्ड 48 से कांग्रेस प्रत्याशी पारसमल माली को कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर जबरन ले जाने की कोशिश की गई। इसकी सूचना मिलते ही उनके समर्थक मौके पर पहुंच गए। इसी बीच कोतवाली थाना पुलिस भी वहां पहुंची और प्रत्याशी को अपने साथ ले गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की।
पुलिस पहुंची तो समर्थकों से हुई बहस
पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई। प्रत्याशी के भाई और समर्थक पुलिसकर्मियों से उलझ गए। इस दौरान ASP नितेश आर्य समेत पुलिस अधिकारियों के साथ काफी देर तक बहस हुई। मौके पर मौजूद लोगों ने घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया, जो सामने आने के बाद चर्चा में है। इसके बाद पुलिस पारसमल माली को सुरक्षा के बीच सुरक्षित स्थान पर ले गई।
ASP बोले- कार में बैठा मिला प्रत्याशी
ASP नितेश आर्य के मुताबिक पुलिस को कांग्रेस प्रत्याशी को जबरन उठाकर ले जाने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो पारसमल माली कुछ लोगों की मौजूदगी में एक कार में बैठे मिले। पुलिस ने उन्हें कार से बाहर निकाला। इसी दौरान वहां मौजूद समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो युवकों को डिटेन किया और संबंधित कार को भी जब्त कर लिया। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
चुनाव खत्म होते ही शुरू हुई बाड़ेबंदी की चर्चा
बाड़मेर नगर परिषद में मतदान खत्म होने के साथ ही प्रत्याशियों को अपने पक्ष में सुरक्षित रखने की राजनीतिक कवायद शुरू होने की चर्चा है। भाजपा के सामने नगर परिषद में सत्ता हासिल करने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस मौजूदा बोर्ड बचाने की कोशिश में है। ऐसे में दोनों दल अपने प्रत्याशियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। परिणाम आने से पहले प्रत्याशियों की आवाजाही पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।
कांग्रेस में दो गुटों की अलग-अलग बाड़ेबंदी की चर्चा
कांग्रेस के लिए इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुकाबला और दिलचस्प बना दिया है। इसी वजह से पार्टी के भीतर प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद तेज होने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशियों की दो अलग-अलग गुटों की ओर से बाड़ेबंदी किए जाने की बात सामने आ रही है। कुछ प्रत्याशियों के भूमिगत होने की भी चर्चा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा समेत कई नेता प्रत्याशियों के संपर्क में बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन चर्चाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
भाजपा बोली- बाड़ेबंदी नहीं, प्रत्याशी परिवार के साथ
दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशियों के भी पार्टी कार्यालयों पर जुटने की जानकारी सामने आई है। हालांकि भाजपा की ओर से बाड़ेबंदी किए जाने से इनकार किया गया है। पार्टी का कहना है कि प्रत्याशी एकजुट हैं और परिवार के साथ हैं। चुनाव परिणाम से पहले भाजपा कार्यालय में प्रत्याशियों को बुलाए जाने की बात भी सामने आई है। पार्टी की ओर से प्रत्याशियों की स्थिति और चुनावी समीकरण पर नजर रखी जा रही है।
50 निर्दलीय प्रत्याशी बन सकते हैं किंगमेकर
बाड़मेर नगर परिषद चुनाव में करीब 50 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। कई वार्डों में इन प्रत्याशियों ने भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुनौती दी है। ऐसे में यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय प्रत्याशी बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि मतदान खत्म होने के बाद दोनों प्रमुख दलों की नजर निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी टिक गई है। आने वाले दिनों में समर्थन जुटाने की राजनीतिक कवायद तेज हो सकती है।
नतीजों से पहले बढ़ी सियासी हलचल
बाड़मेर में चुनाव परिणाम 14 सितंबर को सामने आने हैं। उससे पहले प्रत्याशियों की गतिविधियों और राजनीतिक संपर्कों ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी को कथित तौर पर जबरन ले जाने की घटना ने इस हलचल को और बढ़ा दिया है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं दोनों प्रमुख दल बहुमत के आंकड़े और निर्दलीयों के संभावित समर्थन को लेकर अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं।