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Rajasthan Nikay Chunav: वोटिंग खत्म होते ही बदली रणनीति, नतीजों से पहले भाजपा-कांग्रेस का ‘नंबर गेम’ शुरू

राजस्थान निकाय चुनाव के पहले चरण में 162 निकायों के लिए मतदान खत्म होते ही भाजपा और कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल दी है। बुधवार देर रात से ही दोनों दलों ने संभावित विजेता प्रत्याशियों और मजबूत निर्दलीयों से संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया। कई जगह पार्टी प्रत्याशियों को एकजुट कर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कवायद शुरू हो गई। पहले गुरुवार सुबह से बाड़ेबंदी की तैयारी बताई जा रही थी, लेकिन मतदान खत्म होते ही कई निकायों में गतिविधियां तेज हो गईं। अब सभी की नजर 14 सितंबर को आने वाले नतीजों पर है, लेकिन उससे पहले ही बोर्ड बनाने का ‘नंबर गेम’ शुरू हो गया है।

मतदान खत्म होते ही क्यों शुरू हुआ नंबर गेम?

पहले चरण के 162 निकायों में मतदान पूरा होने के बाद राजनीतिक दल संभावित नतीजों का अनुमान लगाने में जुट गए हैं। जिन निकायों में किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना कम है, वहां निर्दलीय प्रत्याशी अहम हो सकते हैं।

इसी वजह से भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ संभावित मजबूत निर्दलीयों से भी संपर्क साध रहे हैं। हालांकि वास्तविक स्थिति मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।

भाजपा ने शुरू किया ‘बैकअप प्लान’

भाजपा की ओर से जिला अध्यक्षों, निकाय प्रभारियों, सांसदों और विधायकों को संभावित चुनावी समीकरणों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी की रणनीति उन निकायों पर विशेष ध्यान देने की है, जहां परिणाम त्रिकोणीय या बहुकोणीय रहने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान ही पार्टी ने प्रभावशाली निर्दलीय प्रत्याशियों पर नजर रखी थी। अब संभावित विजेताओं से संपर्क बढ़ाने की कोशिश हो रही है। भाजपा का मकसद यह बताया जा रहा है कि यदि किसी निकाय में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाने का विकल्प खुला रहे।

कांग्रेस को सेंधमारी का डर, मजबूतों को साधने की कोशिश

कांग्रेस ने भी मतदान के तुरंत बाद अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद तेज कर दी। पार्टी की ओर से स्थानीय नेताओं को लगातार उम्मीदवारों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।

बाड़मेर, सिरोही और चित्तौड़गढ़ में देर रात प्रत्याशियों को एकजुट करने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई। वहीं अलवर में भी प्रत्याशियों को बुलाने के संदेश दिए जाने की बात कही गई है। कांग्रेस की नजर उन निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी है, जिनके जीतने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

भीलवाड़ा में भाजपा ने सभी 70 प्रत्याशियों को बुलाया

भीलवाड़ा में भाजपा ने अपने सभी 70 प्रत्याशियों को मतदान खत्म होने के बाद रात में ही एक जगह बुला लिया। इससे संकेत मिला कि पार्टी नतीजों से पहले ही अपने उम्मीदवारों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

अन्य शहरों में भी कुछ प्रत्याशियों को एक साथ रखने या ‘चुनाव टूर’ के नाम पर बाहर ले जाने की जानकारी सामने आई। जहां बुधवार रात व्यवस्था नहीं हो सकी, वहां गुरुवार सुबह उम्मीदवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की जा रही थी।

अलग-अलग जिलों में दिखी बाड़ेबंदी की तस्वीर

राजस्थान के कई निकायों में मतदान के बाद प्रत्याशियों को एकजुट करने की कवायद देखने को मिली।

  • श्रीगंगानगर: भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को एक जगह जुटाने की तैयारी की।
  • बाड़मेर: कांग्रेस ने प्रत्याशियों को एकजुट किया। एक प्रत्याशी को कथित तौर पर ले जाने की कोशिश की सूचना भी सामने आई, जिसे पुलिस और समर्थकों ने रोक दिया।
  • सिरोही और चित्तौड़गढ़: कांग्रेस ने देर रात प्रत्याशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की।
  • जैसलमेर: भाजपा ने भी अपने प्रत्याशियों को एकजुट करने की कवायद शुरू की।
  • अलवर: नगर निगम और मालाखेड़ा नगर पालिका के प्रत्याशियों को बुलाने के संदेश दिए गए।
  • सीकर: पलसाना में भाजपा प्रत्याशियों को फोन कर एक जगह बुलाने की जानकारी सामने आई।
  • दौसा: महवा में भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को रात में एक जगह जुटाया।

रामगंजमंडी में दोनों दलों ने बनाई अलग रणनीति

रामगंजमंडी में भाजपा और कांग्रेस की रणनीति भी चर्चा में रही। जानकारी के अनुसार भाजपा अपने 39 प्रत्याशियों, जिनमें तीन निर्दलीय भी शामिल बताए गए, को खैराबाद ले गई। वहीं कांग्रेस के 35 प्रत्याशियों के साथ दो निर्दलीयों को झालावाड़ ले जाने की बात सामने आई।

यह घटनाक्रम बताता है कि दोनों प्रमुख दल संभावित बोर्ड गठन के लिए अपने-अपने खेमे को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।

मतगणना एजेंट के दस्तावेज भी महत्वपूर्ण

कांग्रेस की ओर से कुछ जगह बाड़ेबंदी से पहले प्रत्याशियों से मतगणना एजेंट से संबंधित फार्म 14-जी लिए जाने और उन पर हस्ताक्षर करवाए जाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी स्तर पर प्रत्याशियों से लगातार संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, इन गतिविधियों का अंतिम उद्देश्य और राजनीतिक परिणाम मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल दोनों दल संभावित आंकड़ों और बोर्ड गठन की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं।

निर्दलीय बन सकते हैं ‘किंगमेकर’

निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका कई जगह निर्णायक हो सकती है। यदि भाजपा या कांग्रेस किसी निकाय में बहुमत के आंकड़े से कुछ सीट पीछे रहती है, तो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यही वजह है कि मतदान खत्म होने के बाद दोनों दल संभावित मजबूत निर्दलीयों पर नजर बनाए हुए हैं। अब 14 सितंबर की मतगणना के साथ यह साफ होगा कि किस पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता है और कहां निर्दलीयों की भूमिका ‘किंगमेकर’ की बनती है।

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