बांग्लादेशी घुसपैठ विवाद के बीच सीमा पर BGB हाई अलर्ट पर
भारत से कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजे जाने के आरोपों के बीच भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव बढ़ गया है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने कई सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ाते हुए थर्मल और इन्फ्रारेड ड्रोन तैनात किए हैं। इसी बीच दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच महानिदेशक स्तर की बैठक भी शुरू हुई है, जिसमें ‘पुश-इन’ का मुद्दा प्रमुख एजेंडे में शामिल है।
सीमा पर बढ़ी निगरानी, ड्रोन से रखी जा रही नजर
बांग्लादेश के हबीगंज सेक्टर में BGB की 55वीं बटालियन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, रात के समय निगरानी के लिए थर्मल और इन्फ्रारेड ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों, ग्राम पुलिस और अंसार-वीडीपी के सदस्यों को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है। सीमावर्ती इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
‘पुश-इन’ को लेकर बांग्लादेश की आपत्ति
बांग्लादेश का आरोप है कि भारत बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाए कथित बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पार भेज रहा है। ढाका इस प्रक्रिया को ‘पुश-इन’ बता रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि ऐसे मामलों में दोनों देशों के बीच तय प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए। यही मुद्दा नई दिल्ली में चल रही BSF और BGB के महानिदेशक स्तर की वार्ता में भी प्रमुख रूप से उठाया जा रहा है।
गृह मंत्री बोले- संप्रभुता से समझौता नहीं
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा है कि सीमा पर तैनात जवान पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी अवैध घुसपैठ या गैर-कानूनी सीमा पार गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं BGB अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
ढाका विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. सीआर अबरार ने कहा कि सीमा पर लोगों को जबरन वापस भेजने या नो-मैन्स लैंड में छोड़ने जैसी घटनाएं मानवीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय हैं। उनका मानना है कि ऐसे विवाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर डाल सकते हैं।
BGB के आंकड़ों में क्या दावा?
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, BGB के आंकड़ों में मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच 2,303 लोगों को बांग्लादेश भेजे जाने का दावा किया गया है। इनमें कुछ भारतीय और म्यांमार के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि इन दावों पर भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।