बीकानेर में जमीन रजिस्ट्री में फर्जीवाड़े की कोशिश: मृत खातेदार के नाम पर सौदा, 5 लोगों पर केस दर्ज
राजस्थान के बीकानेर जिले की खाजूवाला तहसील में जमीन की रजिस्ट्री के दौरान कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि मृत खातेदार की जगह एक अन्य व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए जमीन का बैनामा कराने की कोशिश की गई। असली वारिसों की आपत्ति और दस्तावेजों की जांच के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक दी गई। तहसीलदार की रिपोर्ट पर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रजिस्ट्री के दौरान असली वारिसों की आपत्ति से खुला मामला
पुलिस के अनुसार, 27 जुलाई की शाम करीब 4:30 बजे खाजूवाला तहसील कार्यालय में चक 6 बीजीएम स्थित भूमि से जुड़े दो बैनामा पंजीयन के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। दस्तावेजों में भूमि विक्रेता के रूप में दानाराम का नाम दर्ज था। रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी, तभी मृतक दानाराम के परिजन तहसील कार्यालय पहुंचे और उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। परिजनों का दावा था कि रजिस्ट्री कराने आया व्यक्ति वास्तविक खातेदार नहीं है, क्योंकि दानाराम का पहले ही निधन हो चुका है।
दस्तावेजों की जांच में सामने आया कथित फर्जीवाड़ा
परिजनों की आपत्ति के बाद तहसील प्रशासन ने तत्काल रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक दी और दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराई। प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर प्रस्तुत आधार कार्ड और पैन कार्ड फर्जी पाए गए। अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि जिस व्यक्ति को भूमि विक्रेता के रूप में पेश किया गया था, उसके नाम से तहसील क्षेत्र में कोई भूमि दर्ज नहीं थी। इसके बाद पूरे मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
तहसीलदार की रिपोर्ट पर पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
तहसीलदार एवं उप-पंजीयक हरिश कुमार टाक की रिपोर्ट के आधार पर खाजूवाला थाना पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी करने और आपसी मिलीभगत से जमीन की रजिस्ट्री कराने का प्रयास करने के आरोप लगाए गए हैं। नामजद आरोपियों में कथित फर्जी विक्रेता, जमीन खरीदार और दो गवाह शामिल हैं। मामले की जांच जारी है।
पुलिस जुटी साक्ष्य जुटाने में, कई पहलुओं की होगी जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है। दस्तावेजों की सत्यता, पहचान पत्रों की वैधता और कथित षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होगी। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया में सतर्कता की मिसाल बना मामला
इस घटना ने एक बार फिर भूमि पंजीयन प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन की अहमियत को उजागर किया है। तहसील प्रशासन की सतर्कता और समय पर असली वारिसों की आपत्ति के कारण कथित फर्जीवाड़ा सफल नहीं हो सका। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड, पहचान सत्यापन और दस्तावेजों की गहन जांच से इस तरह के मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।