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राजस्थान: अशोक गहलोत ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। गहलोत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की साख कभी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी मजबूत थी। अब उसकी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मामलों पर सुनवाई चल रही है। हाल में द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा है कि उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।

गहलोत बोले- चुनाव आयोग की साख पर उठे सवाल

अशोक गहलोत ने कहा कि एक समय भारतीय निर्वाचन आयोग की साख दुनिया के कई देशों में उदाहरण मानी जाती थी। उनके अनुसार कई देशों में चुनाव प्रक्रिया के दौरान भारत के चुनाव आयोग से मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाता था।गहलोत ने आरोप लगाया कि मौजूदा कार्यप्रणाली ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से SIR और वोटर लिस्ट को लेकर पहले उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया।हालांकि, चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता। आयोग का कहना है कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके सभी आदेश कानूनी आधार पर जारी किए गए हैं।

14 आपत्तियों की रिपोर्ट का गहलोत ने किया जिक्र

गहलोत ने द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज की गई कथित आपत्तियों का उल्लेख है।रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति दर्ज की। इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और वोटर डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मामलों में दोनों अधिकारियों ने फैसलों को अपने संज्ञान के बिना लिए जाने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई स्वीकार की है। याचिकाओं में चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और SIR की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।याचिकाकर्ताओं ने CEC को पद से हटाने या निलंबित करने जैसी मांगें भी रखी हैं। हालांकि अदालत ने तत्काल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

Form-6 को लेकर भी विवाद

विवाद का एक प्रमुख मुद्दा वोटर बनने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में कथित बदलाव से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत ने Form-6 में किए गए किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी।अदालत ने इस मामले में यह भी जानने की जरूरत बताई कि Form-6 में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ। इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस और तेज हुई है।

गहलोत ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की

अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तत्काल होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से भी अपनी भूमिका निभाने की अपील की।

लोकतंत्र को लेकर जताई चिंता

गहलोत ने कहा कि यदि देश की सर्वोच्च चुनावी संस्था की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े होंगे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंता स्वाभाविक है। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया।हालांकि, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग फिलहाल गहलोत और विपक्ष की राजनीतिक मांग है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है। अदालत के अंतिम निष्कर्ष और चुनाव आयोग के जवाब के बाद ही पूरे विवाद की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

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Stv News Rajasthan

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