Rajasthan Nikay Chunav: अशोक गहलोत बोले- BJP को सबक सिखाएं, अक्ल आएगी
राजस्थान के निकाय चुनाव के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं को बंद करने का आरोप लगाते हुए जनता से निकाय चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने की अपील की। घंटाघर में आयोजित कांग्रेस की जनसभा में गहलोत ने कहा कि बीजेपी को चुनाव में सबक मिलेगा तो पार्टी नेतृत्व को “अक्ल आएगी” और सरकार अपने बचे हुए कार्यकाल में विकास के काम करेगी। उन्होंने चिरंजीवी योजना, पेंशन, शहरी रोजगार और इंदिरा रसोई जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए बीजेपी सरकार पर जनहित की योजनाएं बंद करने का आरोप लगाया।
गहलोत बोले- कांग्रेस का बोर्ड बनाएं
जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर आयोजित जनसभा में अशोक गहलोत ने लोगों से कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव महत्वपूर्ण हैं और जनता को कांग्रेस का बोर्ड बनाने का मौका देना चाहिए।
गहलोत ने दावा किया कि अगर बीजेपी को चुनाव में हार का संदेश मिलेगा तो पार्टी नेतृत्व को अपनी नीतियों पर दोबारा विचार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के बचे हुए कार्यकाल में विकास और जनता से जुड़े काम होने चाहिए।
‘बीजेपी ने जनहित की योजनाएं बंद कीं’
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार पिछले ढाई साल में कांग्रेस सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद कर चुकी है। उन्होंने खास तौर पर चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना का उल्लेख किया।
गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान 25 लाख रुपए तक के निशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई थी, जिसे बीजेपी सरकार ने बदलकर पांच लाख रुपए तक कर दिया। उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन, शहरी रोजगार, अन्नपूर्णा योजना और इंदिरा रसोई जैसी योजनाओं का भी जिक्र किया।
चिरंजीवी योजना को लेकर BJP पर निशाना
गहलोत ने चिरंजीवी योजना को कांग्रेस सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि 25 लाख रुपए तक के निशुल्क इलाज की ऐसी व्यवस्था दुनिया में कहीं नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने योजना का स्वरूप बदल दिया है। हालांकि, योजना के मौजूदा प्रावधानों और गहलोत के दावों के बीच अंतर को लेकर सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आ सकता है।
‘कांग्रेस ने जोधपुर का नक्शा बदल दिया’
गहलोत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान जोधपुर में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय शहर में कई शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालय विकसित हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 20 शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की इमारतें तैयार होने के बावजूद उनमें से कई शुरू नहीं किए जा रहे हैं। गहलोत ने जोधपुर की सड़कों की स्थिति पर भी सवाल उठाए और शहर में जगह-जगह गड्ढे होने का दावा किया।
पानी को लेकर सरकार पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोधपुर की पेयजल व्यवस्था को लेकर भी बीजेपी सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की मेहनत के बाद नहर के जरिए जोधपुर तक पानी पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद गर्मी में लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा।
गहलोत ने दावा किया कि नहर और कायलाना में पर्याप्त पानी होने के बावजूद शहर के लोगों तक उसका उचित वितरण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से पेयजल वितरण व्यवस्था को बेहतर करने की मांग की।
सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का मुद्दा उठाया
गहलोत ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शुरू किए गए सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन स्कूलों के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई का अवसर मिला।
उनका आरोप था कि बीजेपी सरकार ने इन स्कूलों को बंद कर दिया। गहलोत ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ने की दिशा में उठाया गया कदम बताया और कांग्रेस सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं का बचाव किया।
‘Gen-Z ने सरकार को झुकाया’
सभा में गहलोत ने केंद्र सरकार और मंत्रियों के इस्तीफे को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले किसी मंत्री पर आरोप लगने के बाद इस्तीफा देने की परंपरा थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा।
गहलोत ने हालिया Gen-Z आंदोलन का जिक्र करते हुए दावा किया कि युवाओं के दबाव ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने युवाओं की भूमिका को लोकतांत्रिक दबाव के तौर पर रेखांकित किया।
कांग्रेस नेताओं ने भी सभा को किया संबोधित
घंटाघर में आयोजित कांग्रेस की सभा में कई स्थानीय और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी संबोधित किया। इनमें पूर्व विधायक मनीषा पंवार, महेंद्र सिंह बिश्नोई, किशनाराम बिश्नोई, राजेंद्र सिंह सोलंकी, करण सिंह उचियारड़ा, वैभव गहलोत, रमेश बोराणा, कीर्ति सिंह, कुश गहलोत, बद्रीराम जाखड़, कुंती परिहार और सुपारस भंडारी सहित अन्य नेता शामिल रहे।
निकाय चुनाव के बीच हुई इस सभा में कांग्रेस नेताओं ने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। अब मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गहलोत की अपील का चुनावी असर कितना दिखाई देता है।