एंटी-पेपर लीक बिल पर कांग्रेस का हमला, अजय राय बोले- सरकार की नीयत पर सवाल
पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कानून ला रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है।
एंटी-पेपर लीक बिल पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नया संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया है। इस बिल में पेपर लीक मामलों की तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और जांच प्रक्रिया को समय सीमा में पूरा करने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस बिल को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।
अजय राय बोले- कानून और कार्रवाई में अंतर क्यों?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सरकार एक तरफ पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाने की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में विरोधाभास दिखाई दे रहा है। अजय राय ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई रोकनी चाहिए।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला
अजय राय ने आरोप लगाया कि छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार परीक्षा सुधार की बात कर रही है और दूसरी ओर छात्रों पर लाठीचार्ज और मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने इसे सरकार के रवैये पर सवाल खड़ा करने वाला बताया।
नए बिल में सख्त प्रावधानों का प्रस्ताव
केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत दोषियों को 5 से 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं संगठित तरीके से परीक्षा में धांधली करने वालों पर 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट से जल्द न्याय की तैयारी
सरकार का कहना है कि नए संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पेपर लीक मामलों की जांच जल्द पूरी करने और मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे दोषियों पर तेजी से कार्रवाई होगी और छात्रों के हितों की रक्षा होगी।
SIT गठन को लेकर भी अजय राय ने उठाए सवाल
राम मंदिर चंदा मामले से जुड़ी जांच पर भी अजय राय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गठित SIT को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नई SIT के गठन का फैसला उचित कदम है।
विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ी राजनीतिक तकरार
एंटी-पेपर लीक बिल को लेकर संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़कर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद में बहस और तेज होने की संभावना है।