‘रोने से कुछ नहीं होगा, कोर्ट जाइए’—‘सतलुज’ विवाद पर अन्नू कपूर का बड़ा बयान
फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जारी विवाद के बीच अभिनेता अन्नू कपूर ने सेंसरशिप और फिल्म रिलीज को लेकर अपनी राय खुलकर रखी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी फिल्म को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के फैसले पर आपत्ति है, तो निर्माताओं को कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। अन्नू कपूर का कहना है कि ऐसे मामलों में सार्वजनिक सहानुभूति मांगने के बजाय अदालत का दरवाजा खटखटाना अधिक उचित कदम होगा।
‘आपत्ति है तो सुप्रीम कोर्ट जाइए’
एक इंटरव्यू में अन्नू कपूर ने कहा कि यदि किसी फिल्म को CBFC से प्रमाणपत्र नहीं मिलता या उसकी रिलीज पर रोक लगती है, तो फिल्म निर्माताओं के पास न्यायिक विकल्प मौजूद हैं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में तलाशना बेहतर है और केवल सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने से स्थिति नहीं बदलती।
दिलजीत दोसांझ का नाम लेते हुए कही यह बात
अन्नू कपूर ने फिल्म से जुड़े कलाकारों का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसी विवादित विषय पर फिल्म बनाई जाती है, तो उससे जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी पहले से होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्णय से असहमति है तो उसके खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उनके मुताबिक, अदालत में अपनी बात रखना अधिक प्रभावी तरीका है।
‘शांति और कानून-व्यवस्था भी अहम मुद्दा’
अन्नू कपूर ने यह भी कहा कि यदि किसी फिल्म को लेकर कानून-व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आती हैं, तो उन पहलुओं को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ सामाजिक शांति और सार्वजनिक व्यवस्था का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
क्या है ‘सतलुज’ विवाद?
निर्देशक हनी त्रेहान की फिल्म ‘सतलुज’, जिसे पहले ‘पंजाब 95’ के नाम से जाना जाता था, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म लंबे समय तक CBFC से जुड़ी प्रक्रिया में रही। बाद में इसे एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया, लेकिन कुछ समय बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद फिल्म, सेंसरशिप और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।
सेंसरशिप पर बहस जारी
‘सतलुज’ को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों में कानूनी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अन्नू कपूर का बयान इसी बहस के बीच सामने आया है, जिसने चर्चा को नया आयाम दे दिया है।