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धर्मांतरण पर अमित शाह की दो टूक: “लालच देकर आस्था बदलना स्वीकार नहीं”, जनजातीय समागम में दिया बड़ा संदेश

दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धर्मांतरण और आदिवासी संस्कृति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को सम्मानपूर्वक अपने मूल धर्म और संस्कृति के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति को लालच, दबाव या प्रलोभन देकर धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम में उन्होंने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण की भावना की सराहना करते हुए इसे भारत की सबसे मजबूत सामाजिक ताकत बताया।

आदिवासी संस्कृति को बताया भारत की आत्मा

जनजातीय सांस्कृतिक समागम में अमित शाह ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से भारत की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति संरक्षण का सबसे मजबूत आधार रहा है। उन्होंने कहा कि जंगल, जल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के जीवन और अस्तित्व का हिस्सा हैं। शाह ने कहा कि आदिवासी समाज ने बिना किसी लिखित नियम के “एकता में अनेकता” की परंपरा को जीवंत रखा है। उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय समुदायों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भारत की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया है।

“लालच देकर धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता”

अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की आस्था से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को अपने धर्म और परंपराओं के साथ सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिया है। अमित शाह ने कहा कि किसी को प्रलोभन या दबाव के जरिए धर्म बदलने के लिए मजबूर करना सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करने का आह्वान करते हुए कहा कि यही देश को मजबूती और सामाजिक स्थिरता प्रदान करती है।

बिरसा मुंडा और जनजातीय विरासत का किया उल्लेख

अमित शाह ने अपने भाषण में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उन्हें आदिवासी अस्मिता और संघर्ष का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया और समाज को अपनी पहचान बचाने की प्रेरणा दी। शाह ने कहा कि आज पूरी दुनिया टिकाऊ विकास की बात कर रही है, जबकि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीता आया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

भगवान राम और शबरी प्रसंग से दिया सामाजिक एकता का संदेश

कार्यक्रम में अमित शाह ने भगवान राम और शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि त्रेता युग में भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर समाज को समानता और सम्मान का संदेश दिया था। शाह ने निषादराज के प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा से सामाजिक एकता और परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज को बांटने की कोशिश करते हैं, उन्हें भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और इतिहास से सीख लेने की जरूरत है।

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