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White House की दोहरी नीति? पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी और भारत को लेकर उठते सवाल

अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक ओर वॉशिंगटन भारत को अपना अहम रणनीतिक साझेदार बताता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ बढ़ती कूटनीतिक और सुरक्षा सक्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। इसी बीच सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने अमेरिका की नीति पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वॉशिंगटन क्षेत्र में किसी एक शक्ति को प्रमुख बनने से रोकने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि, यह विश्लेषण है और इसे अमेरिकी सरकार की आधिकारिक नीति नहीं माना जा सकता।

अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति पर उठे नए सवाल

भारत और पाकिस्तान के प्रति अमेरिका के अलग-अलग रुख को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल के घटनाक्रमों ने यह धारणा मजबूत की है कि वॉशिंगटन दोनों देशों के साथ अपने रणनीतिक हितों के आधार पर संबंध आगे बढ़ा रहा है। भारत के साथ व्यापार, तकनीक और रक्षा सहयोग जारी है, जबकि पाकिस्तान के साथ भी सुरक्षा और क्षेत्रीय मामलों में संपर्क बढ़ता दिख रहा है। इससे भारत में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका दोनों देशों के बीच संतुलन साधने की नई रणनीति अपना रहा है।

ब्रह्म चेलानी का दावा- पाकिस्तान के साथ फिर बढ़ रही नजदीकी

सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी का कहना है कि अमेरिका की मौजूदा नीति शीत युद्ध के दौर की रणनीति की याद दिलाती है, जब पाकिस्तान को क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए अहम साझेदार माना जाता था। उनके अनुसार, वॉशिंगटन अब पाकिस्तान के साथ संबंधों को फिर मजबूत कर रहा है और दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने की सोच पर काम कर रहा है। हालांकि, यह उनका निजी विश्लेषण है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

‘किसी एक शक्ति का वर्चस्व नहीं’ वाली सोच पर चर्चा

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों की कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों से यह संकेत मिला है कि अमेरिका दक्षिण एशिया में किसी एक देश के अत्यधिक प्रभाव को नहीं चाहता। इसी संदर्भ में यह बहस भी तेज हुई है कि क्या भारत के तेजी से बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि भारत उसके सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के संबंध कई क्षेत्रों में लगातार मजबूत हो रहे हैं।

भारत-अमेरिका रिश्ते अब ज्यादा व्यावहारिक?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के संबंध अब पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और हित-आधारित हो गए हैं। व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक रणनीति दोनों देशों के रिश्तों की प्रमुख आधारशिला बने हुए हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों—जैसे व्यापार शुल्क, वीजा, बाजार पहुंच और आर्थिक प्रतिस्पर्धा—पर मतभेद भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

भारत और पाकिस्तान को समान नजरिए से देखने पर बहस

कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और पाकिस्तान को समान सुरक्षा दृष्टिकोण से देखा जाता है, तो इससे क्षेत्रीय वास्तविकताओं की अनदेखी हो सकती है। उनका तर्क है कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। ऐसे में दोनों देशों के सुरक्षा परिदृश्य और चुनौतियों को अलग-अलग संदर्भ में समझना आवश्यक है।

दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन रहेगा अहम

दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक भू-राजनीति का प्रमुख केंद्र बने रहने की संभावना है। भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बदलते समीकरणों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, आर्थिक साझेदारी और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दे भविष्य में इन संबंधों की दिशा तय करेंगे।

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