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अलवर में विश्व स्तनपान सप्ताह का आगाज, मदर मिल्क बैंक से 26,800 नवजातों को मिला जीवनदायी सहारा

अलवर के महिला चिकित्सालय स्थित मदर मिल्क बैंक एवं समग्र स्तनपान प्रबंधन केंद्र (सीएलएमसी) में शनिवार से विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत की गई। 1 से 7 अगस्त तक चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य मातृ दुग्ध के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्तनपान को बढ़ावा देना है। वर्ष 2016 से संचालित मदर मिल्क बैंक के माध्यम से अब तक हजारों माताओं के सहयोग से 26,800 से अधिक नवजातों को जीवनदायी मातृ दुग्ध उपलब्ध कराया जा चुका है।

विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम के साथ जागरूकता अभियान शुरू

विश्व स्तनपान सप्ताह इस वर्ष “जीवन की एक सतत शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है उसे मजबूत करें” थीम के साथ मनाया जा रहा है। महिला चिकित्सालय में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम के साथ पूरे सप्ताह जागरूकता गतिविधियों की शुरुआत हुई। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य माताओं और परिवारों को यह संदेश देना है कि जन्म के बाद शिशु के लिए मां का दूध सबसे सुरक्षित, पौष्टिक और प्राकृतिक आहार है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्तनपान न केवल नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है बल्कि उसके शारीरिक और मानसिक विकास की मजबूत नींव भी तैयार करता है।

मदर मिल्क बैंक बना हजारों नवजातों के लिए जीवनरक्षक सहारा

प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि महिला चिकित्सालय में 9 सितंबर 2016 से संचालित मदर मिल्क बैंक लगातार जरूरतमंद नवजातों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अब तक 20 हजार से अधिक माताओं ने करीब 49,300 बार मातृ दुग्ध दान कर लगभग 64 लाख 18 हजार मिलीलीटर दूध उपलब्ध कराया है। इस अमूल्य सहयोग के कारण करीब 26,800 नवजात शिशुओं को आवश्यक पोषण मिल सका। यह पहल विशेष रूप से उन शिशुओं के लिए संजीवनी साबित हो रही है जिन्हें जन्म के तुरंत बाद पर्याप्त मातृ दुग्ध उपलब्ध नहीं हो पाता।

कमजोर, बीमार और मातृ दुग्ध से वंचित शिशुओं को मिल रही नई उम्मीद

मदर मिल्क बैंक केवल समयपूर्व जन्मे या कमजोर नवजातों तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पताल में भर्ती गंभीर रूप से बीमार बच्चों, अनाथ शिशुओं, गोद लिए गए बच्चों तथा उन नवजातों को भी मातृ दुग्ध उपलब्ध कराया जाता है जिनकी माताएं किसी कारणवश स्तनपान कराने में सक्षम नहीं होतीं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब तक 13 लाख 50 हजार मिलीलीटर से अधिक मातृ दुग्ध जरूरतमंद माताओं और शिशुओं तक पहुंचाया जा चुका है। यह व्यवस्था नवजात मृत्यु दर कम करने और सुरक्षित शिशु देखभाल को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

45 हजार से अधिक माताओं को मिला परामर्श और प्रशिक्षण

अस्पताल में केवल मातृ दुग्ध संग्रह ही नहीं बल्कि स्तनपान संबंधी परामर्श और प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। अब तक 45 हजार से अधिक माताओं को सही तरीके से स्तनपान कराने, नवजात की देखभाल और मातृ दुग्ध के संरक्षण से जुड़ी जानकारी दी जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही मार्गदर्शन मिलने से माताओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और नवजातों को शुरुआती दिनों में बेहतर पोषण मिल पाता है। इससे स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

सप्ताहभर होंगे जागरूकता कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं

मदर मिल्क बैंक की प्रभारी डॉ. अमनदीप कौर ने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान कार्यशालाएं, पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन लेखन, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और जागरूकता रैली सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में प्रसूताओं, धात्री माताओं, उनके परिजनों और चिकित्सा कर्मियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रमों का उद्देश्य स्तनपान से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना और मातृ दुग्ध के महत्व के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना है।

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Stv News Rajasthan

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