#क्राइम #राज्य-शहर

अलवर के रैणी युवक से रिश्वत मांगने वाली महिला ASI को 3 साल की जेल

अलवर के रैणी निवासी युवक से रिश्वत मांगने के करीब पांच साल पुराने मामले में जयपुर की विशेष अदालत ने बांदीकुई थाने की तत्कालीन महिला ASI ललिता शर्मा को दोषी करार दिया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत ने उन्हें तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामला दुर्घटनाग्रस्त बाइक को छोड़ने और हादसे में शामिल दूसरे वाहन को जब्त करने की कार्रवाई से जुड़ा था। शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने और 500 रुपये लेने की बात सामने आई थी।

बाइक छोड़ने और वाहन जब्त करने के बदले मांगे पैसे

मामले की शिकायत रैणी निवासी हरिओम शर्मा ने 12 मार्च 2021 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बांदीकुई थाने में तैनात तत्कालीन एएसआई ललिता शर्मा दुर्घटनाग्रस्त बाइक को छोड़ने और दुर्घटना करने वाले दूसरे वाहन को जब्त करने की कार्रवाई के बदले रिश्वत मांग रही थीं। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने प्रारंभिक सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान दो हजार रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। जांच के अनुसार, इसी दौरान शिकायतकर्ता से 500 रुपये की राशि भी ली गई थी।

एसीबी सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि

शिकायत की जांच के दौरान एसीबी ने बातचीत और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रिश्वत मांगने के आरोपों का सत्यापन किया। सत्यापन में तत्कालीन एएसआई द्वारा दो हजार रुपये की मांग किए जाने की पुष्टि हुई। इसके अलावा 500 रुपये स्वीकार किए जाने की बात भी सामने आई। इसके बाद एसीबी ने नियमानुसार ट्रेप कार्रवाई की तैयारी शुरू की। हालांकि ट्रेप के दौरान पूरी रिश्वत राशि बरामद नहीं हो सकी। इसके बावजूद मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई और प्रकरण अदालत तक पहुंचा।

ट्रेप के दौरान 1500 रुपये बरामद नहीं हो सके

मामले में एसीबी ने 1500 रुपये की रिश्वत राशि पर फेनोफ्थलीन पाउडर लगाकर ट्रेप की कार्रवाई की तैयारी की थी। लेकिन कार्रवाई के दौरान यह राशि बरामद नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत में इस तथ्य को लेकर भी बहस हुई कि जब ट्रेप के दौरान पूरी रकम नहीं मिली तो आरोपी के खिलाफ दोष सिद्धि किस आधार पर हो सकती है। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि केवल पूरी रकम की बरामदगी न होना मामले को खत्म करने का आधार नहीं है, क्योंकि इससे पहले सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग और 500 रुपये स्वीकार करने के साक्ष्य सामने आ चुके थे।

अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा

मामले की सुनवाई जयपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत में हुई। विशेष न्यायाधीश राजेश दडिया ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद ललिता शर्मा को दोषी माना। राज्य सरकार की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन मंजुला जैन ने अदालत में पैरवी की। अदालत ने दोषी तत्कालीन महिला एएसआई को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

रिश्वत की पूरी रकम न मिलने के बावजूद दोष सिद्ध

इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि ट्रेप कार्रवाई के दौरान रिश्वत की पूरी रकम बरामद नहीं हो सकी थी। इसके बावजूद अदालत ने मामले में पेश किए गए अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना। अभियोजन पक्ष के अनुसार सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग और 500 रुपये स्वीकार किए जाने से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य मौजूद थे। इन्हीं साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना। पांच साल पुराने इस मामले में आए फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में साक्ष्यों की भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

पांच साल बाद आया मामले में फैसला

हरिओम शर्मा की शिकायत से शुरू हुआ यह मामला वर्ष 2021 से अदालत में विचाराधीन था। करीब पांच साल बाद विशेष अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया। महिला ASI को जेल की सजा और जुर्माना लगाए जाने के बाद यह मामला अलवर और दौसा क्षेत्र में भी चर्चा में है। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में केवल ट्रेप के दौरान रकम की बरामदगी ही एकमात्र आधार नहीं होती, बल्कि रिश्वत की मांग और राशि स्वीकार किए जाने से जुड़े अन्य साक्ष्यों पर भी अदालत विचार करती है।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *