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अलवर नगर निगम में पहली बार महिला मेयर की राह साफ, अनारक्षित महिला सीट से बढ़ी सियासी हलचल

अलवर: अलवर नगर निगम के आगामी चुनाव को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। जयपुर स्थित स्वायत्त शासन विभाग में हुई आरक्षण प्रक्रिया में अलवर मेयर का पद अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। इसके साथ ही अब अलवर नगर निगम में पहली बार महिला मेयर चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि अनारक्षित महिला सीट होने के कारण किसी भी वर्ग की महिला इस पद के लिए चुनाव मैदान में उतर सकती है।

अनारक्षित महिला सीट का क्या होगा मतलब?

मेयर पद को अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने का सीधा मतलब है कि इस पद पर केवल महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी, लेकिन उनके लिए किसी विशेष जाति या वर्ग की बाध्यता नहीं होगी। यानी सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी या अन्य वर्ग से आने वाली पात्र महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। आरक्षण की घोषणा के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत महिला चेहरे की तलाश होगी। टिकट की दावेदारी को लेकर आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दलों में गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

भाजपा-कांग्रेस में संभावित दावेदारों की तलाश

मेयर पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा और कांग्रेस में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। पार्टी के भीतर अब महिला नेताओं और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि कुछ ऐसी महिलाएं भी सक्रिय हुई हैं, जो पहले पार्षद चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं थीं, लेकिन मेयर पद के आरक्षण के बाद उनकी राजनीतिक रुचि बढ़ गई है। दोनों दलों के लिए चुनौती केवल उम्मीदवार चुनने की नहीं, बल्कि ऐसा चेहरा उतारने की होगी जो शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में राजनीतिक स्वीकार्यता रखता हो।

अलवर के निकाय इतिहास में महिला नेतृत्व नया नहीं

अलवर नगर परिषद और नगर निगम के पिछले करीब 26 वर्षों के इतिहास को देखें तो महिला नेतृत्व पहले भी देखने को मिला है। इस दौरान दो बार ओबीसी महिला और तीन बार सामान्य महिला वर्ग की प्रतिनिधि सभापति पद पर रह चुकी हैं। हालांकि अब नगर निगम के रूप में मेयर पद पर महिला का चुना जाना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम होगा। इस आरक्षण के बाद महिला नेताओं के लिए स्थानीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर भी सामने आया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रमुख दल किस चेहरे पर भरोसा जताते हैं।

नगर परिषद से नगर निगम बनने के बाद बदला समीकरण

अलवर के पिछले स्थानीय निकाय कार्यकाल में नगर परिषद को नगर निगम में परिवर्तित किया गया था। उस समय कार्यकारी सभापति को ही मेयर के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे नगर निगम के गठन के बाद भी मेयर पद को लेकर चुनावी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी थी। अब आगामी चुनाव में सीधे महिला मेयर के चुने जाने की संभावना ने राजनीतिक महत्व बढ़ा दिया है। निगम क्षेत्र के विस्तार और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

बीना गुप्ता की बर्खास्तगी के बाद बदली थी तस्वीर

पिछले निकाय चुनाव में सभापति का पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। तत्कालीन सभापति बीना गुप्ता को रिश्वत मामले में बर्खास्त किए जाने के बाद नगर निगम का नेतृत्व बदल गया। इसके बाद उपसभापति घनश्याम गुर्जर को सभापति बनाया गया और बाद में उन्हें मेयर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। इस घटनाक्रम के चलते महिला आरक्षण के बावजूद पिछले कार्यकाल में महिला नेतृत्व लगातार कायम नहीं रह सका। अब नए आरक्षण के साथ फिर से महिला नेतृत्व को नगर निगम की कमान मिलने की संभावना बनी है।

करीब दो साल से प्रशासक के भरोसे निगम

अलवर नगर निगम में फिलहाल निर्वाचित बोर्ड नहीं है। पिछले निगम बोर्ड का कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो गया था। इसके बाद से करीब दो वर्षों से जिला कलेक्टर प्रशासक के रूप में नगर निगम का कार्यभार संभाल रही हैं। अब निकाय चुनाव की तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया के साथ राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। मेयर पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद संभावित उम्मीदवारों की तलाश, वार्ड स्तर पर समीकरण और टिकट को लेकर चर्चाएं आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है।

आरक्षण के बाद अब चुनावी रणनीति पर नजर

मेयर पद का आरक्षण तय होने के साथ ही अलवर की स्थानीय राजनीति में चुनावी बिसात बिछने लगी है। भाजपा और कांग्रेस के सामने अब महिला उम्मीदवार के चयन के साथ-साथ वार्ड स्तर पर मजबूत संगठन खड़ा करने की चुनौती होगी। वहीं संभावित दावेदार भी अपने राजनीतिक संपर्क और जनाधार को मजबूत करने में जुट सकती हैं। अब सबकी नजर निकाय चुनाव की आधिकारिक घोषणा और दोनों दलों के संभावित प्रत्याशियों पर रहेगी। अलवर को पहली महिला मेयर कब और कौन मिलेगी, इसका जवाब चुनाव परिणाम के बाद ही सामने आएगा।

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Stv News Rajasthan

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