Alwar Election: अलवर में सियासी हलचल तेज, पार्षदों की बाड़ेबंदी के साथ निर्दलीयों पर भी नजर
अलवर नगर निगम चुनाव में मतदान खत्म होने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस ने वार्डवार नतीजों का आकलन शुरू कर दिया है। दोनों दल अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ संभावित निर्दलीय विजेताओं पर भी नजर बनाए हुए हैं। भाजपा ने बोर्ड गठन की रणनीति के लिए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को अलवर की जिम्मेदारी दी है। वहीं कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में प्रत्याशियों से फीडबैक ले रही है। अब 14 सितंबर के नतीजों से पहले दोनों दल बहुमत के आंकड़े और संभावित राजनीतिक समीकरणों को साधने में जुटे हैं।
भाजपा ने शुरू की प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी की तैयारी
मतदान खत्म होने के बाद भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम शुरू किया है। पार्टी की ओर से गुरुवार को प्रत्याशियों को एक गोपनीय स्थान पर रखने की तैयारी की गई।
इससे पहले प्रत्याशियों और प्रमुख नेताओं की बैठक हुई। इसमें अलग-अलग वार्डों में मतदान के रुझान और मुकाबले की स्थिति को लेकर फीडबैक लिया गया। बाड़ेबंदी के दौरान प्रत्याशियों के मोबाइल फोन जमा कराने की भी तैयारी की चर्चा है। हालांकि, प्रत्याशियों को कहां रखा जाएगा, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
भूपेंद्र यादव के निवास पर जुटे भाजपा प्रत्याशी
भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निवास पर बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रत्याशियों से वार्डवार चुनावी स्थिति का फीडबैक लिया।
गुरुवार सुबह से भाजपा के कई प्रत्याशी और मंत्री संजय शर्मा समेत अन्य पदाधिकारी भी वहां पहुंचे। बैठक के बाद प्रत्याशियों को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने की चर्चा है। पार्टी अब उन वार्डों पर खास नजर रख रही है, जहां मुकाबला बेहद करीबी रहा।
जवाहर सिंह बेढम के सामने बोर्ड बनाने की चुनौती
भाजपा ने नगर निगम बोर्ड गठन की रणनीति के लिए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को अलवर में जिम्मेदारी दी है। अब उनके सामने पार्टी के लिए बहुमत का आंकड़ा जुटाने की चुनौती होगी।
मतदान के बाद वार्डवार समीकरणों को समझने और संभावित विजेताओं की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। यदि भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करती है तो बोर्ड गठन आसान होगा। लेकिन सीटों में अंतर कम रहने पर निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो सकती है।
निर्दलीयों और बागियों पर दोनों दलों की नजर
अलवर नगर निगम चुनाव में कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने निर्दलीय और बागी उम्मीदवार भी मैदान में थे। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों को इन उम्मीदवारों से चुनावी नुकसान की आशंका है।
यदि किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो जीतने वाले निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि दोनों दल संभावित निर्दलीय विजेताओं के राजनीतिक रुझान और स्थानीय समीकरणों का आकलन कर रहे हैं।
कांग्रेस ने भी शुरू किया वार्डवार मंथन
कांग्रेस भी नगर निगम बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की अध्यक्षता में बुधवार रात मोती डूंगरी में बैठक हुई।
बैठक में कांग्रेस के प्रत्याशियों से वार्डवार फीडबैक लिया गया। मतदान के रुझान, बूथ स्तर की स्थिति और संभावित परिणामों पर चर्चा हुई। पार्टी के स्तर पर यह आकलन किया जा रहा है कि किन वार्डों में प्रत्याशियों की जीत की संभावना मजबूत है।
कांग्रेस प्रत्याशियों को भी एकजुट रखने की तैयारी
कांग्रेस ने भी परिणाम से पहले अपने प्रत्याशियों को लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पार्टी की कोशिश है कि संभावित विजेता प्रत्याशी एकजुट रहें और परिणाम के बाद बोर्ड गठन में किसी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता न बने।
कांग्रेस नेताओं की ओर से पहले ही बहुमत से ज्यादा सीटें जीतने का दावा किया गया है। पार्टी निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थन की संभावना पर भी नजर रख रही है।
मेयर पद के लिए भी शुरू हुआ राजनीतिक गणित
अलवर नगर निगम में इस बार मेयर पद अनारक्षित महिला वर्ग के लिए है। ऐसे में चुनाव जीतने वाली महिला पार्षदों में से संभावित दावेदारों को लेकर भी राजनीतिक गणित लगाया जा रहा है।
यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता है तो मेयर चयन में पार्टी नेतृत्व की भूमिका अहम होगी। वहीं त्रिशंकु स्थिति बनने पर निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड गठन के साथ मेयर चुनाव के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
14 सितंबर को खुलेगा बोर्ड का फैसला
अलवर नगर निगम चुनाव के परिणाम 14 सितंबर को सामने आएंगे। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने वार्डों में भाजपा और कांग्रेस को जीत मिली और निर्दलीयों का प्रदर्शन कैसा रहा।
नतीजों से पहले दोनों दल अपनी-अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी से लेकर निर्दलीयों से संभावित संपर्क तक, हर कदम को बोर्ड गठन की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अब असली तस्वीर 14 सितंबर को मतगणना के बाद ही सामने आएगी।