अलवर में जर्जर स्कूल को लेकर धरना, CJP नेता आशुतोष रांका की पुलिस से तीखी बहस
अलवर के थानागाजी क्षेत्र में सरकारी स्कूल की जर्जर छत का एक हिस्सा गिरने के बाद छात्रों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। चार साल से खराब हालत में चल रहे जोधावास सरकारी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका बच्चों के साथ धरने पर बैठ गए। करीब पांच घंटे चले प्रदर्शन के दौरान पुलिस से उनकी तीखी बहस भी हुई। बाद में प्रशासन और शिक्षा विभाग ने कई मांगों पर समय-सीमा तय करते हुए कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया।
जर्जर छत गिरने से सामने आई स्कूल की बदहाली
थानागाजी के जोधावास स्थित सरकारी स्कूल में छत की एक पट्टी गिरने की घटना के बाद विद्यालय की बदहाल स्थिति चर्चा में आ गई। स्थानीय लोगों के अनुसार भवन लंबे समय से जर्जर हालत में था और इसकी मरम्मत की मांग भी उठती रही थी। घटना के बाद बच्चों और अभिभावकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। इसी मुद्दे को लेकर CJP राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका मौके पर पहुंचे और छात्रों के साथ स्कूल परिसर में धरना शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने जर्जर कमरों की मरम्मत, नए कक्षों के निर्माण और स्कूल तक बेहतर रास्ते की मांग उठाई।
स्कूल तक सड़क नहीं, बच्चों को हो रही परेशानी
प्रदर्शन के दौरान स्कूल की दूसरी बड़ी समस्या सड़क की स्थिति को लेकर सामने आई। रांका और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि स्कूल तक पहुंचने के लिए उचित पक्का रास्ता नहीं होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान रास्ते में पानी भरने और नाला पार करने जैसी दिक्कतें बच्चों के लिए जोखिम बढ़ाती हैं। रांका ने प्रशासन से स्कूल भवन और रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लंबी समय-सीमा स्वीकार नहीं की जा सकती और प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
पुलिस से बहस के दौरान रांका का तीखा बयान
धरने के दौरान पुलिस प्रशासन की टीम प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान आशुतोष रांका और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहस हो गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में रांका पुलिसकर्मी से कहते नजर आए कि उनके साथ राजनीति नहीं की जाए। उन्होंने अपने आंदोलन और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन से प्रदर्शनकारियों पर दबाव नहीं बनाने की बात कही। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा, “मेरे से पॉलिटिक्स मत खेलना, देश के शिक्षा मंत्री को हटाकर आया हूं।” उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा।
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी
धरने के दौरान स्कूल परिसर में बच्चों, स्थानीय ग्रामीणों और CJP कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। रांका ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने पुलिस से ऐसे लोगों को स्कूल परिसर से बाहर करने की मांग की। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का अलग बयान सामने आना जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। रांका ने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मुख्य मुद्दा बच्चों की सुरक्षा, स्कूल भवन की मरम्मत और विद्यार्थियों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पांच घंटे बाद प्रशासन ने दिए काम के आश्वासन
करीब पांच घंटे तक चले धरने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। इसके बाद स्कूल की मौजूदा जर्जर कक्षाओं को एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने का आश्वासन दिया गया। इसके अलावा स्कूल में सात नए कमरों के निर्माण का काम अगले तीन महीने में पूरा कराने की बात कही गई। स्कूल तक आने-जाने वाले रास्ते को भी 48 घंटे के भीतर चलने योग्य बनाने का भरोसा दिया गया। प्रशासन की ओर से स्कूल परिसर में बच्चों के लिए खेल मैदान विकसित करने का आश्वासन भी दिया गया। इन आश्वासनों के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
समय पर काम नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना समाप्त होने के बाद CJP की ओर से प्रशासन को तय समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने की चेतावनी दी गई। संगठन का कहना है कि यदि जर्जर कमरों की मरम्मत, नए कक्षों का निर्माण और रास्ते से जुड़े कार्य तय समय में पूरे नहीं हुए तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के अन्य जर्जर सरकारी स्कूलों की स्थिति को भी मुद्दा बनाने की बात कही गई। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिए गए आश्वासनों को समय पर जमीन पर उतारने की है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।