नगर निकाय चुनाव में भाजपा सरकार पर जूली के गंभीर आरोप, राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपा ज्ञापन
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने नगर निकाय चुनाव को लेकर भाजपा सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जूली ने राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपकर चुनाव के दौरान सत्ता और सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग की शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय भाजपा के पक्ष में काम किया। जूली ने आयोग को कुछ मामलों से जुड़े साक्ष्य सौंपने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इससे पहले भी जूली निकाय चुनाव के दौरान पुलिस-प्रशासन के कथित इस्तेमाल और राजनीतिक दबाव के आरोप लगा चुके हैं। इन आरोपों पर भाजपा और निर्वाचन आयोग की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रिया का तथ्य इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपा ज्ञापन
टीकाराम जूली ने नगर निकाय चुनाव से जुड़े मामलों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी शिकायत रखी। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया के दौरान सरकारी तंत्र के कथित इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए कार्रवाई की मांग की।जूली का कहना है कि कांग्रेस की ओर से कई मामलों में पहले भी लिखित शिकायतें की गई थीं। अब उन्होंने आयोग के सामने संबंधित मामलों और उपलब्ध साक्ष्यों को रखने की बात कही है।
अधिकारियों पर लगाए भाजपा के पक्ष में काम करने के आरोप
जूली ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अलावा सामान्य प्रशासन से जुड़े कुछ अधिकारियों को भी चुनाव के दौरान सरकार के हित में इस्तेमाल किया गया।उन्होंने दावा किया कि संविधान की शपथ लेने वाले कुछ अधिकारियों ने निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय कथित तौर पर भाजपा के एजेंट की तरह काम किया। हालांकि, ये आरोप जूली और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच या सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के बाद ही हो सकता है।
विधानसभा में अधिकारियों के नाम रखने की बात
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिन अधिकारियों पर कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं, उनके नाम आने वाले समय में राजस्थान विधानसभा में भी रखे जाएंगे।जूली ने कहा कि संवैधानिक पद पर रहते हुए अधिकारियों की भूमिका का रिकॉर्ड सार्वजनिक चर्चा का विषय बनना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने चुनाव के दौरान निष्पक्षता की अपेक्षा के विपरीत काम किया।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आयोग इन शिकायतों पर किस स्तर की जांच या कार्रवाई करेगा।
पहले भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं
नगर निकाय चुनाव के दौरान टीकाराम जूली ने इससे पहले भी भाजपा पर सत्ता के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए थे। सितंबर की शुरुआत में उन्होंने चुनावी माहौल में राजनीतिक दबाव और सरकारी तंत्र के इस्तेमाल की बात कही थी।कांग्रेस ने नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी कुछ स्थानों पर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। पार्टी ने अलवर, भीलवाड़ा, बसेड़ी और मथानिया सहित कुछ जगहों का उल्लेख करते हुए निर्वाचन आयोग से संज्ञान लेने की मांग की थी।
जूली ने भाजपा के चुनावी प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल
ज्ञापन देने के दौरान जूली ने भाजपा के नगर निकाय चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तुलना में भाजपा को इस बार कम वोट मिले हैं।उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और भाजपा के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहा। जूली ने भाजपा की ओर से निकाय चुनाव के परिणाम को प्रचंड बहुमत के तौर पर पेश किए जाने पर सवाल उठाया।यह जूली का राजनीतिक आकलन है। चुनाव परिणामों की व्याख्या सीटों, वोट प्रतिशत और अलग-अलग निकायों के आधार पर अलग हो सकती है।
सरकार पर उपलब्धियां छिपाने का आरोप
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी कथित कमियों और नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री तक से सोशल मीडिया पर प्रचार करवाती रही।उन्होंने नगर निकाय चुनाव के परिणामों को लेकर भाजपा के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को चुनावी प्रदर्शन का मूल्यांकन वास्तविक वोट और सीटों के आधार पर करना चाहिए।
शिकायतों पर कार्रवाई की मांग
जूली ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव के दौरान सामने आए मामलों की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।कांग्रेस की ओर से जिन मामलों में पहले शिकायतें दी गई हैं, उनके दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी आयोग के सामने रखने की बात कही गई है। अब इन शिकायतों पर निर्वाचन आयोग और संबंधित प्रशासनिक संस्थाओं की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज
नगर निकाय चुनाव के बाद राजस्थान में बोर्ड गठन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। जूली के ताजा आरोप इसी विवाद का हिस्सा हैं।इस पूरे मामले में एक ओर कांग्रेस सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग की जांच की मांग कर रही है, वहीं चुनाव प्रक्रिया की वैधानिकता और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका का अंतिम आकलन संबंधित जांच और सक्षम संस्थाओं के निष्कर्षों से ही होगा।