अलवर में पहली बार रिमोट से होगा रावण दहन, 65 फीट का रावण और लेजर शो रहेगा आकर्षण
अलवर में दशहरा उत्सव को इस बार आधुनिक तकनीक और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाने की तैयारी है। 20 अक्टूबर को दशहरा मैदान में रावण दहन का भव्य आयोजन होगा। इस बार भगवान राम का पात्र बाण चलाने के बजाय रिमोट का बटन दबाकर रावण का दहन करेगा। आयोजन में 65 फीट ऊंचा रावण, 60 फीट का कुंभकरण और 55 फीट का मेघनाथ बनाया जा रहा है। इसके अलावा लेजर शो, ग्रीन आतिशबाजी, सेल्फी पॉइंट और रावण दहन से पहले विजय यज्ञ भी आकर्षण रहेंगे।
पहली बार रिमोट से होगा रावण दहन
अलवर में दशहरा पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के दशहरा मैदान में 20 अक्टूबर को मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस बार रावण दहन में तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।जिला पुरुषार्थी समिति के अनुसार, भगवान राम का पात्र रावण पर बाण चलाने के बजाय रिमोट का बटन दबाएगा। इसके जरिए पुतले का दहन किया जाएगा। आयोजन में यह प्रयोग दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा।समिति अध्यक्ष कुलदीप कालरा और संरक्षक राकेश अरोड़ा सहित पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता में तैयारियों की जानकारी दी। समिति का कहना है कि इस बार उत्सव को पहले से अधिक भव्य बनाने की योजना है।
65 फीट ऊंचा रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले तैयार
दशहरा मैदान में इस बार तीन विशाल पुतले बनाए जा रहे हैं। इनमें रावण का पुतला 65 फीट ऊंचा होगा। वहीं, कुंभकरण का पुतला 60 फीट और मेघनाथ का पुतला 55 फीट ऊंचा तैयार किया जा रहा है।इन पुतलों के निर्माण के लिए आगरा से विशेष कारीगर बुलाए गए हैं। कारीगरों ने काम शुरू कर दिया है। समिति के मुताबिक, सभी पुतलों को 20 अक्टूबर से पहले तैयार कर लिया जाएगा।पुतलों में विशेष तकनीकी व्यवस्था भी की जा रही है। रावण के सिर, आंख और हाथ घूम सकेंगे। इससे रावण दहन के दौरान दर्शकों को अलग अनुभव मिलने की उम्मीद है।
डीग की जगह आगरा के कारीगरों को मिली जिम्मेदारी
समिति अध्यक्ष कुलदीप कालरा ने बताया कि पहले अलवर में रावण के पुतले बनाने के लिए डीग के कारीगरों को बुलाया जाता था। इस बार समाज के पदाधिकारियों और लोगों के सुझाव पर आगरा के कारीगरों को जिम्मेदारी दी गई है।पुतलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बांस बरेली से मंगवाया गया है। वहीं, ग्लेज्ड पेपर दिल्ली से लाया गया है।कारीगर तीनों पुतलों को आकर्षक रूप देने में जुटे हैं। समिति की कोशिश है कि तकनीकी व्यवस्था और पुतलों की बनावट के जरिए दशहरा उत्सव को यादगार बनाया जाए।
लेजर शो और ग्रीन आतिशबाजी बढ़ाएगी आयोजन की रौनक
इस बार दशहरा मैदान में लेजर शो का आयोजन भी किया जाएगा। इसके साथ गाजियाबाद के कारीगरों की ओर से रंग-बिरंगी ग्रीन आतिशबाजी की जाएगी।आयोजन स्थल पर दर्शकों के लिए सेल्फी पॉइंट भी तैयार किए जाएंगे। इससे लोग उत्सव के दौरान तस्वीरें लेकर यादों को संजो सकेंगे।रिमोट से रावण दहन, घूमते हुए पुतलों के अंग और लेजर शो इस बार के आयोजन को खास बनाएंगे। कार्यक्रम में शहरवासियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए समिति व्यापक तैयारियां कर रही है।
रावण दहन से पहले पहली बार होगा विजय यज्ञ
इस वर्ष दशहरा कार्यक्रम में विजय यज्ञ भी शामिल किया गया है। समिति के अनुसार, रावण दहन से पहले यह आयोजन किया जाएगा। इसे अलवर के दशहरा कार्यक्रम में नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।समिति का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक तकनीक और आकर्षक प्रस्तुतियों को जोड़ना है। विजय यज्ञ के बाद रावण दहन कार्यक्रम आयोजित होगा।
आजादी के बाद से निभाई जा रही दशहरा आयोजन की परंपरा
अलवर में दशहरा पर्व पर रावण दहन का मुख्य आयोजन जिला पुरुषार्थी समिति की ओर से किया जाता है। समिति के अनुसार, आजादी के बाद से पुरुषार्थी समाज इस परंपरा को उत्साह के साथ निभाता आ रहा है।इस बार भी आयोजन को भव्य स्वरूप देने के लिए समाज के लोग और समिति पदाधिकारी जुटे हुए हैं।प्रेसवार्ता में अभिषेक तनेजा, केके मदान, पुरुषोत्तम मनचंदा, लीलाधर कथूरिया, रमेश जुनेजा, दीवान चंद सेतिया, सुदर्शन अरोड़ा, तिलक झांब और विशाल गांधी सहित समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।