उदयपुर में बदल रहा मिठाइयों का स्वाद, अहमदाबाद से आ रहा मीठा मावा और मिल्क केक
दीपावली से पहले उदयपुर के मिठाई बाजार में अहमदाबाद से तैयार मीठे मावे और मिल्क केक की आवक बढ़ रही है। व्यापारियों के अनुसार, मीठे मावे की रोजाना खपत करीब 2,000 किलो तक पहुंच गई है। इससे स्थानीय पारंपरिक मावे की मांग घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गई है। कारोबार में आई कमी के कारण आसपास के गांवों की कई मावा भट्टियां बंद होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, मिल्क केक के नाम पर सूजी का हलवा बिकने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर, त्योहार के कारण मेवों की मांग और कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
अहमदाबाद से रोजाना आ रहा मीठा मावा
दीपावली से पहले मिठाई बाजार में तैयार उत्पादों की आवक बढ़ गई है। उदयपुर में अहमदाबाद से दूध पाउडर से तैयार मीठा मावा बड़ी मात्रा में पहुंच रहा है। व्यापारियों के अनुसार, ट्रैवल्स के जरिए इसकी खेप आती है। एक खेप में 30-30 कट्टे होने की बात बताई गई है।व्यापारियों का दावा है कि इस मावे में करीब 25 प्रतिशत मावा और 75 प्रतिशत पाउडर होता है। इसे थाल में जमाकर तैयार किया जाता है। करीब आधे घंटे में इसे काटने लायक बनाया जा सकता है। इससे पेड़े, मावे के लड्डू और बर्फी जैसी मिठाइयां तैयार की जा रही हैं।इस मीठे मावे की कीमत करीब 190 रुपए प्रति किलो बताई गई है। व्यापारियों के अनुसार, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी रोजाना खपत लगभग 2,000 किलो है।
स्थानीय मावे की मांग घटने से गांवों की भट्टियां बंद
वल्लभनगर, कुराबड़ और बंबोरा सहित आसपास के गांवों में दूध से पारंपरिक फीका मावा तैयार किया जाता है। इसकी कीमत करीब 240 से 260 रुपए प्रति किलो बताई गई है।व्यापारियों के अनुसार, पहले स्थानीय मावे की मांग अच्छी रहती थी। हालांकि, अब कई दुकानदार कम समय में मिठाइयां तैयार करने के लिए बाहर से आने वाले मीठे मावे का इस्तेमाल कर रहे हैं।पारंपरिक मावे से मिठाई बनाने में अधिक समय लगता है। इसके मुकाबले तैयार मीठे मावे से काम जल्दी हो जाता है। कारोबारियों का कहना है कि मांग में कमी आने से कई गांवों में मावा बनाने वाली भट्टियां बंद हो गई हैं।व्यापारियों के मुताबिक, बाजार में स्थानीय मावे की हिस्सेदारी घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गई है। इससे पारंपरिक मावा कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।
मिल्क केक के नाम पर सूजी का हलवा बिकने का दावा
उदयपुर के बाजार में अहमदाबाद से तीन किलो के डिब्बों में एक अन्य उत्पाद भी पहुंच रहा है। इसे मिल्क केक के नाम से बेचे जाने की बात कही जा रही है।व्यापारियों के अनुसार, यह उत्पाद सूजी और चीनी से तैयार हलवे जैसा है। इसकी कीमत तीन किलो के डिब्बे के लिए 570 से 600 रुपए बताई गई है। बाजार में रोजाना 1,000 से 1,500 डिब्बों की आवक का दावा भी किया गया है।कारोबारियों का कहना है कि दूध से तैयार मिल्क केक या कलाकंद की लागत करीब 400 रुपए प्रति किलो तक पड़ती है। ऐसे में तीन किलो का डिब्बा 570 से 600 रुपए में मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उत्पाद की वास्तविक सामग्री और गुणवत्ता की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है।
दीपावली पर मेवों की मांग और कीमतें ऊंची
त्योहार के सीजन में काजू, बादाम, पिस्ता, अंजीर और अन्य मेवों की मांग बनी हुई है। बाजार में अलग-अलग किस्मों के मेवे ऊंचे भाव पर बिक रहे हैं।व्यापारियों के अनुसार, काजू 900 से 1,400 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। अमेरिकन बादाम के भाव 1,050 से 1,400 रुपए और मामरा बादाम के भाव 2,800 से 5,000 रुपए प्रति किलो हैं। ईरानी रोस्टेड पिस्ता 1,700 से 2,000 रुपए प्रति किलो बिक रहा है।अंजीर के भाव 800 से 2,500 रुपए प्रति किलो हैं। मुनक्का 600 से 1,200 रुपए, इंडियन दाख 400 से 600 रुपए और कंधारी दाख 500 से 700 रुपए प्रति किलो बिक रही है। काली दाख के भाव 500 से 800 रुपए प्रति किलो बताए गए हैं।
चिलगोजा और खजूर के भाव भी ऊंचे
बाजार में अखरोट 800 से 1,000 रुपए प्रति किलो और अखरोट गिरी 1,000 से 1,800 रुपए प्रति किलो बिक रही है। सऊदी खजूर की कीमत किस्म के अनुसार 350 से 2,200 रुपए प्रति किलो तक बताई गई है।वहीं, चिलगोजा 3,600 से 4,000 रुपए और चिलगोजा गिरी करीब 5,500 रुपए प्रति किलो बिक रही है। व्यापारियों के अनुसार, कुछ मेवों की फसल प्रभावित होने और आवक कम रहने से कीमतों में तेजी आई है।दीपावली के दौरान मिठाइयों और मेवों की खरीदारी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बाजार में तैयार मिठाइयों की गुणवत्ता, उनकी सामग्री और कीमतों पर उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।