अलवर में नाली निर्माण का घोटाला: 95 लाख के काम में ईंटों का खेल, हल्की बारिश में ढहा ढांचा; पार्षद ने लगाया भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप
अलवर नगर निगम द्वारा तिजारा फाटक के पास शिव कॉलोनी में कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। निगम ने ठेकेदार को कुल 2 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों का ठेका दिया था, जिसमें से 95 लाख रुपये की लागत वाली इस नाली का निर्माण हाल ही में हुई हल्की बारिश में ही ध्वस्त हो गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हुए रोड़ी-सरिए की जगह ईंटों का इस्तेमाल किया गया और सीमेंट का उपयोग न के बराबर किया गया। पूर्व पार्षद सोनू चौधरी ने निगम अधिकारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत का खुलासा करते हुए गुणवत्ताहीन निर्माण के लिए जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
निर्माण में भारी अनियमितता: रोड़ी-सरिए की जगह लगाई गई ईंटें
स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि नाली निर्माण के दौरान तकनीकी स्पेसिफिकेशन की खुलेआम अवहेलना की गई। नियमानुसार नाली की नींव और दीवारों में मजबूती के लिए रोड़ी और सरिए (लोहे की सलाखों) का उपयोग होना चाहिए था, लेकिन ठेकेदार ने लागत बचाने के चक्कर में कमजोर ईंटों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, मसाला तैयार करने में मुट्ठी भर सीमेंट का प्रयोग करके उसे रेत और मिट्टी से भर दिया गया। इस घटिया सामग्री के कारण नाली की संरचना इतनी कमजोर हो गई कि मामूली बारिश के दबाव को भी वह सहन नहीं पाई और बड़ा हिस्सा ढह गया।
जनता का आक्रोश: ‘सीमेंट का नामोनिशां नहीं, दीवारों में पड़ रही दरारें’
शिव कॉलोनी के निवासियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहाँ सीमेंट का नामोनिशां नहीं है। विनोद कुमार ग्रोवर जैसे स्थानीय लोगों ने बताया कि मसाला लगभग नहीं के बराबर लगाया गया है। महिला निवासी सरोज ने बताया कि वे पिछले चार महीनों से परेशान हैं, पहले खुदाई कर छोड़ दी गई थी जिससे बच्चे गिरने का खतरा बना रहता था, और अब जो निर्माण हुआ है उसमें भी जान नहीं है। दूसरी ओर, विजय लक्ष्मी और अमर सिंह जैसे बुजुर्ग निवासियों ने बताया कि नाली की खुदाई और निर्माण के कारण उनके मकानों की दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं, क्योंकि पानी का निकास सही नहीं हो पा रहा है।
तकनीकी खामी: नाली का अलाइनमेंट ही गलत, पानी निकासी असंभव
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग की बुनियादी गलतियां की गई हैं। सबसे बड़ी खामी यह है कि नाली निर्माण का अलाइनमेंट ही गलत किया गया है। नई बनने वाली नाली का मिलान आगे चलकर मुख्य बड़े नाले से सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में, भले ही नाली बन जाती, तो भी बारिश का पानी बाहर निकलना नामुमकिन था, जिससे जलभराव की समस्या और बढ़ जाती। ठेकेदार ने लंबे समय तक खुदाई करके छोड़ रखी, जिससे लोगों का रास्ता बंद रहा और अब जो काम हुआ है, वह पूरी तरह बेकार साबित हो रहा है।
पूर्व पार्षद का गंभीर आरोप: 49% कम रेट पर ठेका, अधिकारियों से मिलीभगत
मामले में पूर्व पार्षद सोनू चौधरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि यह टेंडर वास्तविक लागत से 49 प्रतिशत कम रेट पर ठेकेदार प्रवीण चौधरी को दिया गया था। इतनी कम दर में गुणवत्तापूर्ण काम करना असंभव है, जिससे स्पष्ट होता है कि यहाँ कमीशन का खेल चल रहा है। सोनू चौधरी का कहना है कि निगम के कुछ कर्मचारी और अधिकारी ठेकेदार के साथ मिले हुए हैं और गलत नाप-जोख कर भुगतान करने की तैयारी में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नगर निगम खुद भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है?
समय सीमा का उल्लंघन: 3 महीने का काम, 8 महीने से अधूरा
प्रशासनिक लापरवाही का एक और पहलू सामने आया है। पूर्व पार्षद के अनुसार, इस काम के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की गई थी और अगस्त के बाद काम शुरू होना था, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक 10 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है। ढाई किलोमीटर लंबी नाली का निर्माण होना था, लेकिन मनमर्जी के चलते काम लटकता रहा। निवासियों ने जेईएन और सरकार के हेल्पलाइन नंबर 181 पर शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन निगम कर्मचारियों ने उनकी सुनवाई नहीं की। अब जब नाली ढह गई है, तो सवाल यह उठता है कि मकानों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा और जनहानि के लिए कौन जिम्मेदार होगा?