अलवर में कांग्रेस की बाड़ाबंदी से निर्दलीय प्रत्याशी लौटे, बोले- ‘चुनाव लड़कर पछता रहा हूं’
खबर का सारांश
अलवर निकाय चुनाव के बाद पार्षदों की बाड़ाबंदी को लेकर सियासत गरमा गई है। वार्ड 22 के निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप मीणा कांग्रेस की बाड़ाबंदी से रात करीब ढाई बजे अलवर लौट आए। कुलदीप ने आरोप लगाया कि होटल में उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टर बुलाने की मांग की गई, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिलता रहा। वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थक पुलिस की मदद से उन्हें जबरन लेकर गए। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच मामला राजनीतिक विवाद बन गया है।
सीने में दर्द के बाद डॉक्टर बुलाने की मांग का दावा
कुलदीप मीणा के मुताबिक वह अपनी इच्छा से कांग्रेस की बाड़ाबंदी में शामिल हुए थे। उनका कहना है कि उन्हें 21 सितंबर तक अन्य पार्षदों के साथ रहना था। इसी दौरान होटल में उनकी तबीयत खराब हो गई और सीने में दर्द की शिकायत हुई। कुलदीप का दावा है कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं से कई बार चिकित्सक बुलाने को कहा, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचा। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार को फोन किया।
परिवार होटल पहुंचा, रात में अलवर लौटे
कुलदीप ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत भी खराब है। ऐसे में परिवार पहले से ही परेशान था। उनके फोन के बाद परिजन होटल पहुंचे। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में उन्हें वापस अलवर लाया गया। कुलदीप के अनुसार वह अपनी मर्जी से कांग्रेस की बाड़ाबंदी में गए थे। हालांकि, तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने वहां से लौटने का फैसला किया।
बोले- चुनाव लड़कर पछता रहा हूं
कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद कुलदीप मीणा ने वार्ड 22 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। बाड़ाबंदी से लौटने के बाद उन्होंने कहा कि अब वह जनता से राय लेने के बाद ही किसी को समर्थन देने का फैसला करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने को लेकर अब वह पछता रहे हैं।
कुलदीप ने यह भी दावा किया कि उन पर पैसे लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों को गलत बताया। उनके अनुसार चुनाव के दौरान तनाव के कारण उनका करीब 22 किलो वजन कम हुआ है और उनकी तबीयत भी खराब है।
BJP प्रत्याशी ने कहा- कुलदीप का फोन आया था
भाजपा के पार्षद प्रत्याशी अजय पूनिया ने दावा किया कि कुलदीप मीणा का फोन उनके पास आया था। अजय के अनुसार कुलदीप वहां से निकलना चाहते थे, लेकिन उन्हें आने नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने कहा कि कुलदीप के बीमार होने और इलाज नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद वे उन्हें लेने पहुंचे थे।
अजय पूनिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कैंप में कई बाउंसर मौजूद थे। उनके अनुसार विवाद की स्थिति बनने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा। भाजपा पक्ष का कहना है कि कुलदीप अपनी सहमति से उनके साथ अलवर आए और उनकी ओर से कोई अभद्रता नहीं की गई।
कांग्रेस ने लगाया जबरन ले जाने का आरोप
कांग्रेस की ओर से भाजपा पर अलग आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा समर्थक पुलिस की मदद से कुलदीप मीणा को जबरन लेकर गए। पार्टी ने पार्षदों की बाड़ाबंदी के दौरान वन विभाग के प्रवर्तन दल को भेजे जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में कुलदीप मीणा ने खुद कहा है कि वह अपनी इच्छा से कांग्रेस की बाड़ाबंदी में गए थे और बाद में अपनी तबीयत खराब होने के कारण वहां से लौटे।
टीकाराम जूली ने सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनावों में पुलिस के इस्तेमाल के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। अब कांग्रेस पार्षदों के कैंप में वन विभाग के प्रवर्तन दल को भेजे जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जूली ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा न हो कि 21 सितंबर तक सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों को पार्षदों को इकट्ठा करने के काम में लगा दिया जाए। उन्होंने सरकार पर प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।