अलवर के कलाकार ने रद्दी अखबार से रचा कमाल, भगवान जगन्नाथ के रथ की बनाई अनोखी प्रतिकृति
अलवर के एक युवा हस्तशिल्प कलाकार ने अपनी रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश देते हुए रद्दी अखबार से भगवान जगन्नाथ के रथ की आकर्षक प्रतिकृति तैयार की है। बिना लकड़ी, लोहे या किसी धातु का उपयोग किए बनाई गई यह कलाकृति अपनी बारीक डिजाइन और मजबूत संरचना के कारण लोगों का ध्यान खींच रही है। श्रद्धालु और कला प्रेमी इस अनोखे रथ को देखकर कलाकार की कल्पनाशीलता की सराहना कर रहे हैं।
सिर्फ अखबार और फेविकोल से तैयार हुआ भव्य रथ
हस्तशिल्प कलाकार शेखर चंद प्रजापति ने इस रथ को पूरी तरह रद्दी अखबार और फेविकोल की मदद से तैयार किया है। उन्होंने कागज के पन्नों को मोड़कर, रोल बनाकर और सावधानीपूर्वक जोड़ते हुए इसे मजबूत रूप दिया। इस कलाकृति में लकड़ी, लोहे, कील, तार या किसी अन्य धातु का उपयोग नहीं किया गया है। लगभग 20 इंच लंबा, 10 इंच चौड़ा और 17.5 इंच ऊंचा यह मॉडल देखने में इतना आकर्षक है कि पहली नजर में यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि इसे केवल कागज से बनाया गया है।
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मंदिर को समर्पित की अपनी अनोखी कलाकृति
शेखर चंद प्रजापति ने बताया कि उनका उद्देश्य इस कलाकृति का व्यावसायिक उपयोग करना नहीं, बल्कि इसे भगवान जगन्नाथ की सेवा में समर्पित करना था। उन्होंने रथयात्रा के अवसर पर यह प्रतिकृति अलवर के सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ महाराज मंदिर प्रशासन और मेला समिति को भेंट की। अब मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस अनोखे रथ का दर्शन कर रहे हैं। कलाकार ने उम्मीद जताई कि इस तरह की रचनात्मक पहल स्थानीय कला और हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने में मदद करेगी।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कलाकार से मिली प्रेरणा
शेखर ने बताया कि उन्हें कला की प्रेरणा अपने परिवार से मिली। उनके फूफाजी टेराकोटा कला के प्रसिद्ध कलाकार हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उसी प्रेरणा ने उन्हें पेपर आर्ट की दिशा में काम करने के लिए उत्साहित किया। निजी नौकरी के साथ-साथ वे अपने खाली समय में नई-नई कलाकृतियां तैयार करते हैं। उनका मानना है कि साधारण और बेकार समझी जाने वाली चीजों से भी असाधारण रचनाएं बनाई जा सकती हैं।
पहले भी बना चुके हैं कई आकर्षक मॉडल
यह पहली बार नहीं है जब शेखर ने अपनी कला से लोगों को प्रभावित किया हो। इससे पहले भी वे अखबार और 3D पेपर आर्ट तकनीक की मदद से इंद्र विमान, राजस्थान रॉयल्स की थीम और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे कई आकर्षक मॉडल तैयार कर चुके हैं। उनकी हर रचना में बारीक कारीगरी और रचनात्मक सोच साफ दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कलाकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन मिलने से राजस्थान की लोक एवं हस्तशिल्प कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।