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अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- 2014 में बनती टास्क फोर्स तो देश और तेजी से करता विकास

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है और यदि परीक्षा सुधार के लिए टास्क फोर्स 2014 में ही बना दी गई होती तो देश विकास की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सकता था। साथ ही उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम के गठबंधन प्रस्ताव पर भी प्रतिक्रिया दी।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का मुद्दा आज देश के करोड़ों युवाओं से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद शिक्षा व्यवस्था लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने छात्रों और युवाओं की जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि युवा अपने अधिकारों और बेहतर व्यवस्था की मांग को लेकर पहले से अधिक सजग हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार उनकी आवाज को दबाने में सफल नहीं होगी और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।

टास्क फोर्स के गठन पर उठाए सवाल

परीक्षा सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में प्रस्तावित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत महसूस हो रही थी तो यह कदम 2014 में ही उठा लेना चाहिए था। उनके अनुसार, समय रहते सुधार लागू किए जाते तो शिक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होती और देश विकास की गति को और तेज कर सकता था।

2027 चुनाव पर गठबंधन के सवाल से किया किनारा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की ओर से समाजवादी पार्टी को दिए गए गठबंधन प्रस्ताव पर अखिलेश यादव ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अब तक जिस राजनीतिक रास्ते पर चलती आई है, उसी दिशा में आगे भी काम करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल उनका ध्यान संगठन और जनता के मुद्दों पर केंद्रित है, न कि संभावित गठबंधनों पर।

युवाओं और शिक्षा को बनाया राजनीतिक मुद्दा

अखिलेश यादव के ताजा बयान से साफ है कि समाजवादी पार्टी आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा और परीक्षा सुधार जैसे विषय प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकते हैं, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी।

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