अजमेर बम धमकी मामला: ई-मेल से दहशत फैलाने वाला आरोपी गुजरात से गिरफ्तार, कई खुलासों की उम्मीद
राजस्थान के अजमेर में लगातार सरकारी संस्थानों को ई-मेल के जरिए बम धमकियां भेजकर दहशत फैलाने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने गुजरात से एक युवक को गिरफ्तार कर उसे अजमेर लाकर अदालत में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी का संबंध केवल अजमेर तक सीमित है या प्रदेशभर में भेजी गई अन्य धमकी भरी ई-मेल के पीछे भी वही या उसका कोई नेटवर्क सक्रिय था।
गुजरात से दबोचा गया आरोपी, पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी
सिविल लाइंस थाना पुलिस ने गुजरात के सोमनाथ पाटन क्षेत्र की वेणेश्वर सोसायटी निवासी फलदू हार्दिक रमेशचंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम उसे मंगलवार देर रात अजमेर लेकर पहुंची और प्रारंभिक पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश किया। अदालत ने आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा है। जांच अधिकारी अब उससे ई-मेल भेजने के उद्देश्य, तकनीकी तरीकों, उपयोग किए गए उपकरणों और किसी संभावित सहयोगी या नेटवर्क के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
आरटीओ और जिला न्यायालय को भेजी गई थीं धमकी भरी ई-मेल
पुलिस के अनुसार 9 जुलाई को अजमेर के घूघरा स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) को ई-मेल भेजकर जहरीली साइनाइड गैस और बम विस्फोट की धमकी दी गई थी। इसके कुछ दिन बाद 13 जुलाई को जिला एवं सेशन न्यायालय को भेजे गए एक अन्य ई-मेल में परिसर में जिलेटिन बम लगाए जाने का दावा किया गया। इन दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। धमकियों के कारण संबंधित संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर तलाशी अभियान भी चलाया गया था।
साइबर तकनीक और डिजिटल ट्रेल से आरोपी तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने साइबर विशेषज्ञों की मदद से ई-मेल की तकनीकी पड़ताल की। डिजिटल ट्रेल, आईपी से जुड़े तकनीकी साक्ष्य और अन्य इलेक्ट्रॉनिक इनपुट के आधार पर जांच गुजरात तक पहुंची। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां दबिश देकर आरोपी को हिरासत में लिया। अब रिमांड के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि धमकी वाले ई-मेल भेजने के लिए किन डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया गया और क्या इस काम में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है। पुलिस आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच कर रही है।
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प्रदेशभर में भेजी गई धमकियों से भी जोड़े जा रहे तार
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि पिछले कुछ महीनों में राजस्थान के विभिन्न सरकारी कार्यालयों, कलेक्ट्रेट, अदालतों और अन्य संवेदनशील संस्थानों को भेजी गई फर्जी बम धमकियों का इस आरोपी से कोई संबंध है या नहीं। यदि तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ में समानता मिलती है तो कई पुराने मामलों की गुत्थी भी सुलझ सकती है। पुलिस इस पूरे मामले को साइबर अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रकरण मानते हुए सभी पहलुओं पर गहन जांच कर रही है।
बीते महीनों में कई संस्थानों को मिल चुकी हैं फर्जी धमकियां
अजमेर सहित राजस्थान के विभिन्न सरकारी कार्यालयों और संवेदनशील संस्थानों को पिछले कुछ महीनों में कई बार ई-मेल के माध्यम से बम धमकियां मिल चुकी हैं। इनमें दरगाह-कलेक्ट्रेट परिसर, जिला कलेक्ट्रेट, सेशन कोर्ट, पासपोर्ट कार्यालय और जयपुर हाईकोर्ट जैसे प्रमुख संस्थान शामिल रहे हैं। हर बार सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन किसी भी स्थान पर विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। अब पुलिस को उम्मीद है कि हालिया गिरफ्तारी से इन मामलों के पीछे की पूरी साजिश और जिम्मेदार लोगों का खुलासा हो सकता है।