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संविदा नर्सिंगकर्मी की मौत के बाद झुका प्रशासन, परिवार को नौकरी, आवास और आर्थिक सहायता का भरोसा

जयपुर के एसएमएस अस्पताल में संविदा नर्सिंगकर्मी दीपक चरवाल की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन आखिरकार प्रशासन और परिजनों के बीच सहमति बनने के बाद समाप्त हो गया। नौकरी छूटने से आहत होकर आत्महत्या करने वाले नर्सिंगकर्मी के परिवार को राहत देने के लिए प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पत्नी को संविदा नौकरी, आवास, आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ देने पर सहमति बनी है। इस घटनाक्रम ने संविदा कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा और रोजगार व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

नौकरी समाप्त होने के बाद बढ़ा मानसिक दबाव

दीपक चरवाल पिछले करीब चार वर्षों से महिला चिकित्सालय में संविदा नर्सिंगकर्मी के रूप में कार्यरत थे। बताया गया कि 12 जून को अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी आदेश में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। अचानक नौकरी जाने की सूचना ने कई कर्मचारियों को मानसिक रूप से झकझोर दिया। परिजनों और साथियों का आरोप है कि रोजगार छिनने की चिंता और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना ने दीपक को गहरे तनाव में डाल दिया। इसी मानसिक दबाव के बीच उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

अस्पताल परिसर में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

घटना की जानकारी मिलते ही एसएमएस अस्पताल परिसर में कार्यरत संविदा कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में कर्मचारी अस्पताल परिसर में एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को बिना पर्याप्त कारण के हटाना अन्यायपूर्ण है। मृतक के परिजनों ने भी आर्थिक सहायता और परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग उठाई। हालात को देखते हुए अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासन ने स्थिति को संभालने के प्रयास शुरू किए।

नेताओं की मौजूदगी से तेज हुई वार्ता

धरना स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंचे। विपक्षी नेताओं ने संविदा कर्मचारियों के मुद्दे को गंभीर बताते हुए सरकार और प्रशासन से संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग की। नेताओं की मौजूदगी के बाद प्रशासन और परिजनों के बीच बातचीत का दौर तेज हुआ। कई घंटों तक चली चर्चा के दौरान परिवार की मांगों और कर्मचारियों की चिंताओं पर विस्तार से विचार किया गया। अंततः प्रशासन ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए राहत पैकेज पर सहमति जताई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

परिवार को मिली राहत, कई मांगें स्वीकार

समझौते के तहत मृतक की पत्नी को मेडिकल कॉलेज में संविदा आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। इसके साथ ही परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आवास की व्यवस्था के लिए सरकारी योजनाओं के माध्यम से मदद प्रदान करने पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा परिवार को पालनहार योजना सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का निर्णय लिया गया है, ताकि बच्चों और आश्रितों को भविष्य में आर्थिक सहायता मिल सके।

संविदा कर्मचारियों के मुद्दे पर नई बहस

इस घटना ने प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की रोजगार सुरक्षा और कार्यस्थल पर स्थायित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को अचानक हटाने से उनके जीवन और परिवार पर गंभीर असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नीति और सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाना आवश्यक है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार किया जाएगा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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