मदन राठौड़ के नाम से फर्जी लेटरपैड का इस्तेमाल, सिरोही में आरोपी गिरफ्तार
राजस्थान के सिरोही जिले में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ के नाम से कथित फर्जी लेटरपैड और जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर प्रशासनिक अधिकारी को पत्र भेजने का मामला सामने आया है। पत्र में एक दुकान के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। सत्यापन के दौरान दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई और पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है।
एसडीएम को भेजा गया कथित फर्जी पत्र
पुलिस के अनुसार पिंडवाड़ा उपखंड अधिकारी को एक व्हाट्सएप नंबर से मदन राठौड़ के नाम का लेटरपैड भेजा गया। पत्र में स्थानीय बाजार में स्थित एक दुकान को अतिक्रमण बताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर जब पत्र की पुष्टि की गई तो पता चला कि संबंधित पत्र न तो सांसद कार्यालय से जारी हुआ था और न ही उस पर मौजूद हस्ताक्षर वास्तविक थे। इसके बाद मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
निजी सचिव की शिकायत के बाद खुला मामला
मामले की जानकारी मिलते ही मदन राठौड़ के निजी सचिव प्रभु दयाल यादव ने सिरोही पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजी। शिकायत में जनप्रतिनिधि के नाम और पद का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा प्रशासन को गुमराह करने का आरोप लगाया गया। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित दस्तावेजों और डिजिटल माध्यम से भेजे गए संदेश की जांच शुरू कर दी।
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तकनीकी जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने व्हाट्सएप नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया। तकनीकी जांच के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की गई और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस ने बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच की जा रही है कि इस फर्जी पत्र के पीछे केवल व्यक्तिगत रंजिश थी या किसी बड़े षड्यंत्र के तहत यह दस्तावेज तैयार किया गया था।
पूरे नेटवर्क और मंशा की जांच जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी लेटरपैड और हस्ताक्षर तैयार करने में आरोपी अकेला था या उसके साथ अन्य लोग भी शामिल थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल पहले भी कहीं किया गया है या नहीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच की जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।