अभिजीत दीपके ने चीन और ट्रंप के मुद्दे पर PM मोदी को घेरा, सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भारत के संबंधों को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने विदेश और व्यापार नीति पर सवाल उठाते हुए सरकार की आलोचना की। इसके अलावा, दीपके ने दिल्ली में संभावित प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की प्राथमिक जिम्मेदारी देश की सीमाओं की रक्षा करना होनी चाहिए। दीपके ने ये बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए कहीं।
चीन और ट्रंप को लेकर PM मोदी पर निशाना
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के सामने सरकार अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा रही है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भी भारत अपनी बात मजबूती से नहीं रख रहा है।दीपके ने तंज के अंदाज में प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उनकी टिप्पणी भारत के चीन और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर थी। हालांकि, ये दीपके के राजनीतिक आरोप और विचार हैं। इन्हें विदेश नीति की स्थापित तथ्यात्मक स्थिति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी उठाए सवाल
अभिजीत दीपके इससे पहले भी भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने अमेरिकी सामान पर टैरिफ और अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान की खरीद के मुद्दे उठाए थे।इसके अलावा, उन्होंने रूस से तेल आयात को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल किए। दीपके ने इन मुद्दों के जरिए केंद्र सरकार की विदेश और व्यापार नीति पर निशाना साधा।इन बयानों के संदर्भ में व्यापार समझौतों, खरीद संबंधी दावों और टैरिफ की शर्तों को आधिकारिक दस्तावेजों से अलग-अलग जांचना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इन दावों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं है।
दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती पर जताई आपत्ति
दीपके ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ सुरक्षा बलों का इस्तेमाल कर रही है।उनका कहना है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। दीपके ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर चिंता जताई।उन्होंने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि राजधानी को किले में बदलने के बजाय सीमाओं की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना चाहिए।हालांकि, सुरक्षा बलों की तैनाती का उद्देश्य और जरूरत प्रशासनिक आकलन पर निर्भर करते हैं। किसी प्रदर्शन के दौरान बलों की मौजूदगी अपने आप में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनुचित कार्रवाई का प्रमाण नहीं है।
संभावित प्रदर्शनों के बीच बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली में संभावित विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की अवधि बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने 273 CAPF कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ाई है।इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती जारी रखने का अनुरोध किया था। संभावित प्रदर्शन स्थलों में जंतर-मंतर, चुनाव आयोग, संसद क्षेत्र और इंडिया गेट का उल्लेख किया गया था।ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। एक तरफ प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। दूसरी तरफ, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और नागरिकों की आवाजाही का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
चीन और भारत की सेनाओं को लेकर भी चर्चा
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर चीन और भारत की सेनाओं के बीच अंतर का जिक्र करते हुए एक पोस्ट साझा की। इसके साथ उन्होंने सुरक्षा बलों की तैनाती के मुद्दे को भी उठाया।उनकी टिप्पणी का मुख्य तर्क यह था कि देश की सैन्य और सुरक्षा क्षमताओं का उपयोग प्राथमिक राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए।हालांकि, चीन और भारत की सैन्य क्षमताओं की तुलना कई पहलुओं पर निर्भर करती है। इनमें सैनिकों की संख्या, तकनीक, तैनाती, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक परिस्थितियां शामिल हैं। केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर सैन्य क्षमता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
विदेश नीति और सुरक्षा व्यवस्था पर जारी बहस
अभिजीत दीपके की टिप्पणी ने विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है। उनके सवाल चीन, अमेरिका के साथ संबंधों और दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती से जुड़े हैं।इन मुद्दों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष और संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। वहीं, प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाते समय कानून-व्यवस्था के साथ नागरिक अधिकारों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।फिलहाल दीपके के बयान को सरकार की नीतियों पर उनकी राजनीतिक आलोचना के रूप में देखा जा सकता है। उनके आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों की जांच आवश्यक है।