घर लौटे अभिजीत दीपके, पिता का दावा- आंदोलन के दौरान मिली धमकियां, परिवार ने झेला मानसिक तनाव
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर लौट आए हैं। उनकी घर वापसी पर परिवार भावुक नजर आया। इस दौरान उनके पिता भगवानराव दीपके ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान परिवार को धमकियां मिलीं और लगातार मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। वहीं अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गई तो उनका संगठन फिर से आंदोलन शुरू करेगा।
पिता का दावा- परिवार को मिली थीं धमकियां
अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में दावा किया कि आंदोलन के दौरान परिवार को धमकी भरे संदेशों और वीडियो का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, एक वीडियो में कथित तौर पर कहा गया था कि यदि अभिजीत किसी विशेष राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुए तो परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भगवानराव ने कहा कि इन घटनाओं ने पूरे परिवार को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया था।
’40-45 दिन चिंता में बीते’
भगवानराव दीपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान परिवार लगातार चिंता और बेचैनी में रहा। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ महीने तक घर का माहौल सामान्य नहीं रहा और परिवार के सदस्यों की दिनचर्या भी प्रभावित हुई। उनके अनुसार, अभिजीत लंबे समय तक दिल्ली में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, जिससे परिवार हर समय उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित था। उन्होंने यह भी कहा कि अभिजीत ने अपने सामाजिक उद्देश्य के लिए नौकरी तक छोड़ दी, जिसे परिवार ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद समर्थन दिया।
सादगी के साथ हुआ स्वागत
घर लौटने पर अभिजीत दीपके का परिवार, रिश्तेदारों और समर्थकों ने स्वागत किया, लेकिन इसे बेहद सादगीपूर्ण रखा गया। भगवानराव दीपके ने बताया कि अभिजीत को दिखावा या भव्य आयोजन पसंद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी जब वह घर आए थे, तब उन्होंने बड़े स्वागत समारोह से मना कर दिया था। परिवार का कहना है कि अभिजीत हमेशा साधारण जीवनशैली में विश्वास रखते हैं और सामाजिक कार्य को प्रचार से अधिक महत्व देते हैं।
अभिजीत बोले- अब कुछ दिन परिवार के साथ रहना चाहता हूं
घर पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके ने कहा कि लंबे आंदोलन के बाद अपने परिवार के बीच लौटना उनके लिए भावुक पल है। उन्होंने बताया कि लगातार 37 दिनों तक जंतर-मंतर पर रहने के बाद अब वह कुछ समय अपने घर और परिवार के साथ बिताना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद सामान्य जीवन में लौटना राहत देने वाला अनुभव है और अब उन्हें कुछ समय आराम करने का अवसर मिलेगा।
एफआईआर वापस नहीं हुई तो फिर होगा आंदोलन
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर अपनी मांग पर कायम है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गई तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर पहले से बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने हाल ही में लाए गए सार्वजनिक परीक्षा से जुड़े संशोधन कानून पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल नए कानून बनाने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।