छात्र आंदोलन पर आदित्य ठाकरे का बड़ा ऐलान, बोले- मुकदमे मुफ्त लड़ेंगे; सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों को राहत दी
देशभर में प्रवेश परीक्षाओं को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों के बीच राजनीति और न्यायपालिका दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। Aaditya Thackeray ने प्रदर्शनकारी छात्रों को मुफ्त कानूनी सहायता देने का ऐलान किया है। वहीं, Supreme Court of India ने अंतरिम राहत देते हुए 18 वर्ष से कम आयु के उन छात्रों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत ने साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और मामले की निष्पक्ष जांच पर भी जोर दिया।
आदित्य ठाकरे बोले- छात्रों के केस बिना फीस लड़ेंगे
मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ अब भी कानूनी कार्रवाई जारी है, जबकि पहले मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र को नोटिस मिलता है, तो वह शिवसेना (यूबीटी) से संपर्क कर सकता है। पार्टी की ओर से वकील बिना किसी शुल्क के उनका मुकदमा लड़ेंगे। ठाकरे ने इसे छात्रों के अधिकारों की रक्षा का कदम बताते हुए सरकार से सभी लंबित मामलों की समीक्षा करने की मांग की।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान कई स्थानों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यदि कहीं लाठीचार्ज या अन्य कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र की MH-CET परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और राज्य सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरकारों की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग छात्रों को दी अंतरिम राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के उन छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसे छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। न्यायालय ने माना कि मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें।
सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश
शीर्ष अदालत ने पुलिस और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। अदालत का मानना है कि इन साक्ष्यों से घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच में मदद मिलेगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दर्ज एफआईआर के आधार पर कानून के अनुसार जांच जारी रह सकती है, लेकिन अगले आदेश तक छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
छात्र आंदोलन पर देशभर की नजर
परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्र आंदोलनों को लेकर देशभर में बहस जारी है। राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर बयान दे रहे हैं, जबकि अदालतें कानूनी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रही हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट, सरकारी फैसलों और न्यायालय की अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।