जोधपुर में अनोखी मिसाल: सास ने बहू को बेटी मानकर उपहार में दे दिया अपना घर
JDA शिविर में भावुक कर देने वाला फैसला
जोधपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के शहरी सेवा शिविर में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल जीत लिया। शिविर में पहुंचीं घुडकी देवी ने अपनी बहू संतोष चौधरी को बेटी का दर्जा देते हुए अपना मकान उसके नाम कर दिया। नामांतरण आदेश प्राप्त करने के दौरान उन्होंने कहा कि “बेटियां भाग्य से मिलती हैं और बहू भी बेटी ही होती है। जिस घर में बहू आती है, वहां खुशहाली लेकर आती है। इसलिए मैंने अपना घर अपनी बेटी समान बहू को उपहार स्वरूप दे दिया।” उनके इस फैसले की शिविर में मौजूद लोगों ने जमकर सराहना की।
वर्षों से लंबित काम भी हुए पूरे
शहरी सेवा शिविर कई परिवारों के लिए राहत लेकर आया। रमजानजी का हत्था, नांदड़ी निवासी शायरा बानों को वर्षों के इंतजार के बाद अपने भूखंड का पट्टा मिल सका। उन्होंने काफी पहले भूखंड खरीदा था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों और जानकारी के अभाव में लीज डीड नहीं बनवा पाई थीं। शिविर में जोन-1 के उपायुक्त प्रवीण रत्नू ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और अधिकारियों के सहयोग से उनका लंबित कार्य पूरा कराया। साथ ही उन्हें राज्य सरकार की विशेष छूट का लाभ भी मिला।
122 मामलों का हुआ निस्तारण
JDA की उपसचिव एवं शहरी सेवा शिविर की नोडल अधिकारी सुमन राठौड़ ने बताया कि शिविर में विभिन्न सेवाओं से जुड़े कुल 122 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें कृषि भूमि पर बसी स्वीकृत योजनाओं और प्राधिकरण की योजनाओं के 44 पट्टे जारी किए गए। इसके अलावा 28 नामांतरण, 4 उपविभाजन एवं पुनर्गठन तथा 29 लीज राशि जमा से जुड़े मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।
कई क्षेत्रों में लगाए गए शहरी सेवा शिविर
जोधपुर विकास प्राधिकरण ने विभिन्न जोनों के कई गांवों और कॉलोनियों में ये शिविर आयोजित किए। इनमें पालासनी, खोलिया, सेवालों की ढाणी, फिटकासनी, रसीदा, बोरानाड़ा, तनावड़ा, बड़लिया, लोरडी देजगरा, जोलियाली, जानादेसर, इन्द्रोका, बागा, मंडोर तथा विवेक विहार सहित कई क्षेत्रों के लोगों को विभिन्न सेवाओं का लाभ दिया गया।
इससे पहले भी सामने आई थी रिश्तों की मिसाल
गौरतलब है कि इससे पहले भी JDA के शहरी सेवा शिविर में एक भावुक घटना सामने आई थी, जब दो भाइयों ने अपनी दिवंगत मां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पैतृक संपत्ति का पूरा हिस्सा अपनी बहन के नाम कर दिया था। दोनों भाइयों ने नामांतरण के लिए आवेदन देकर यह संदेश दिया कि रिश्तों का मूल्य किसी भी संपत्ति से कहीं अधिक होता है।