रामगढ़ में विद्यार्थियों का अरावली संरक्षण आंदोलन तेज, ‘अरावली बचाओ–देश बचाओ’ के नारे गूंजे
अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को समाप्त करने संबंधी आए आदेश के विरोध में राजस्थानभर में आंदोलन तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार दोपहर रामगढ़ राजकीय महाविद्यालय के छात्र-छात्रियों ने ‘अरावली बचाओ–देश बचाओ’ अभियान के समर्थन में रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन उपखंड अधिकारी बाबूलाल वर्मा को सौंपा।
महाविद्यालय से शुरू हुई रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंची। हाथों में तख्तियां लिए युवाओं ने “खनन बंद करो”, “पर्यावरण बचाओ–भविष्य बचाओ” जैसे नारे लगाए। रैली के दौरान छात्रों का उत्साह और आक्रोश साफ झलक रहा था, जिससे कुछ समय के लिए पूरा कस्बा आंदोलन के माहौल में डूब गया।
छात्र राजू मेघवाल ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अरावली के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अनियंत्रित खनन से जलस्तर गिरने, पर्यावरणीय संकट बढ़ने और किसानों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका गहरी है।
छात्रों का कहना है कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि उत्तर भारत की पर्यावरणीय ढाल है। इसके क्षरण से रामगढ़ सहित आसपास का इलाका रेगिस्तान में बदल सकता है और कृषि भूमि बंजर होने का खतरा है। इसी चिंता के तहत छात्रों ने आदेश को वापस लेने की मांग की है।
रैली में लखन सपेरा, मनीष मेघवाल, सोनू, जितेंद्र, मयंक, निखिल महावर, संजना, पूजा, कोमल, मुस्कान सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल रहे। युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि अरावली क्षेत्र में खनन नहीं रोका गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर युवाओं की आवाज अब और मुखर होती जा रही है।