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900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई—SIT गठित, कई शीर्ष अफसर रडार पर

राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत हुए लगभग 900 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार की जांच अब तेज हो गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को औपचारिक अनुमति मिलते ही विभाग ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है। यह मामला राज्य की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल पैदा कर रहा है।

SIT गठन: ACB ने शुरू की हाई-लेवल जांच

ACB के डीजी गोविंद गुप्ता ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) बनाया है।
SIT की कमान एसपी महावीर सिंह राणावत को सौंपी गई है, जबकि जांच की सुपरविजन की ज़िम्मेदारी आईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के पास रहेगी। टीम में एएसपी हिमांशु कुलदीप, भूपेंद्र सिंह और महावीर प्रसाद शर्मा को शामिल किया गया है।
यह टीम जल जीवन मिशन के कार्यों, टेंडरों और फंड उपयोग की गहन पड़ताल करेगी।

पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी से बढ़ी जांच की रफ्तार

इस घोटाले से जुड़े मामले में पहले ही पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी हो चुकी है। उनकी भूमिका टेंडर आवंटन और फंड उपयोग से जुड़ी बताई जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद अब ACB ने पूरी सिस्टम में शामिल अधिकारियों तक जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

कई वरिष्ठ IAS और इंजीनियर अधिकारी रडार पर

सरकार ने ACB को जिन अफसरों के खिलाफ जांच की औपचारिक अनुमति दी है, उनमें शामिल हैं—

तत्कालीन ACS (IAS) सुबोध अग्रवाल

चीफ इंजीनियर दलीप गौड़

अधीक्षण अभियंता मुकेश गोयल

चीफ इंजीनियर केडी गुप्ता

एडिशनल चीफ इंजीनियर सुधांशु दीक्षित

एसईएन संजय अग्रवाल

इन सभी अधिकारियों की भूमिका टेंडर प्रक्रियाओं, बजट आवंटन और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जुड़ी होने की संभावना जताई जा रही है।

दो अधिकारियों पर निर्णय लंबित—सरकारी फाइल अटकी

तत्कालीन उप सचिव (RAS) गोपाल सिंह और वित्तीय सलाहकार केसी कुमावत के खिलाफ जांच की अनुमति अभी मंजूर नहीं हुई है।
सरकार के पास उनकी फाइल अभी विचाराधीन है, जिसके चलते ACB उन पर जांच शुरू नहीं कर सकी है।

बड़ा घोटाला, बड़े सवाल

900 करोड़ रुपये का यह कथित घोटाला केवल भ्रष्टाचार की बात नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मिशन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।
ACB का SIT बनाना यह संकेत देता है कि सरकार और एजेंसियां मामले को हल्के में नहीं ले रहीं।
हालांकि पूरी तस्वीर तभी साफ होगी जब SIT अपनी शुरुआती रिपोर्ट पेश करेगी।

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